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लोग खुद धोखा खाते हैं

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बीते हुए लम्हों को जब याद करते हैं
        
                                                    
                            
खोए हुए पल सब अपने हो जाते हैं
हम भी कहां कह पाते दिल के हालात
वो कुछ कहते नहीं पल गुजर जाते हैं
खुशबू अपना मक़ाम खुद ढूंढ लेती
कलियां भी वही शाखों पर रह जाती हैं
दर दर जाकर किस्सा सुनाने वाले लोग
खुद भी एक दिन किस्सा बन जाते हैं
कौन बचाएगा जहां में नफरत वालो से
फूल भी अगर शाखों से धोखा खाते हैं

- केबी सोपारीवाला
3 वर्ष पहले
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