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आशा दीप

Krishna Murari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो न मिटा सकें अंधेरा दिलों का,
        
                                                    
                            
हमें ऐसा सूरज नहीं चाहिए।
जो न जगा दे जीवन की आशा,
वह सुमधुर गीत नहीं चाहिए।
जो न लाये प्रेम की मिठास,
हमें वह मलय नहीं चाहिये।
जो न दे सके चिंतित मुखार बिन्दुओं पर मुस्कान की एक लकीर,
मुझे ऐसे गीतों की कोयल नहीं चाहिये।
बढ़ रहे मौत के लंबे सायों को
जहर से बुझे जल से भरे बादलों को
जो नष्ट कर सके वही अर्जुन
वही गांडीव चाहिए।
चाहिये हमें संबल उन भुजाओं का
जो दे सकें गरीबों को सहारा।
हमें चाहिये वे कठोर बातें
जो लाएं अनुशासन का भी बवंडर,
दिलायें गरीब भूखों को निवाला,
हमें ऐसा मसीहा चाहिये।
जगा दे दिलों में आशा की ज्योति
हमें ऐसा एक मात्र दीप चाहिये।
जो न मिटा सकें अंधेरा दिलों का,
हमें ऐसा सूरज नहीं चाहिए।
जगा दे दिलों में आशा की ज्योति
हमें ऐसा एक मात्र दीप चाहिये।

- कृष्ण मुरारी

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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