देखो सावन की फुहार आई,
बहिना भाई घर त्योहार लाई।
बहिना के बिना कलाई सूनी,
भाई के बिना बहिना अधूरी।
यह राखी बंधन भाई बहिनों का,
रक्षा सूत्र निभाता भाई सरहदों का।
रक्षा बंधन जज़्बातों का बंधन है,
हर बहिन हर भाई का चंदन है।
सारा जमाना देखे यह राखी का बंधन,
संकल्प लेता हर कोई बहिनों का संगम।
सदा सुखी रहे बहिना यह आरजू भाई की,
लाज सदा बचाये रखना भाई बहिनों की।
जब जब सावन की फुहार आयेगी,
तब तब बहिना घर त्यौहार लायेगी।
यह राखी का बंधन है ,
भाई बहिनों का संगम है।
रक्षा संकल्प हर भाई ने लिया है ,
बहिनों ने कलाई को चूम लिया है।
धरा का सिंगार भाई बहिनों का प्यार है ,
यह राखी का त्योहार बहिनों का निसार है।
- बाबा
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