आसमान मुझसे ये हिसाब मांगेगा ,
चाँद किसका खूबसूरत है जवाब मांगेगा ,
इस बार कर ली है साज़िश मैंने भी
हक़ में रहूंगा उसके ही जो इंक़लाब मांगेगा
सारी रियायत उल्टी, ये उल्टा दौर हो चला ,
सुना है अब जो हारेगा वो भी ख़िताब मांगेगा
अंधेरी रातों में साथ जुगनुओं का भी न मिला ,
हौंसला मेरा खुदा से लड़ कर महताब मांगेगा,
लव तेरी ज़िंदगी को महका कर रखा रातरानी ने
नागफ़नियों के शहर में अब कौन गुलाब मांगेगा ।।
- लव जोशी
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