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इंंसानियत

Nihar Srivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़रा गरीबों के हालातों को समझे हम।
        
                                                    
                            
चंद रुपये होने से,
खुद को खुदा ना समझे हम।
भौतिकता का पल्लू छोड़,
जीवों की अहमियत को समझे हम।
स्वार्थ भरी ज़िंदगी का अंत कर,
चलो इंसानियत को समझे हम।

~निहार श्रीवास्तव


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6 वर्ष पहले
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