यार ये मौसम भी कैसे कैसे इतराता हे
कभी पिला कभी नीला कई रंग दिखाता हे
कभी गरजता हे तो कभी बीजली चमकाता हे
मीठी मीठी यादों संग बारिश ये बरसाता हे...
कभी ये ऐसी ठंडी पवन चलाता है,
मासूम से दिल को मेरे तड़पाता हे,
मेरी धड़कनो में धड़क रहा जो पागल,,
बार-बार उसकी याद दिलाता है...
ख़ुद तो बरसता नही मेरी आँखों को नम कर जाता हे,,,
यार ये मौसम भी कैसे कैसे इतराता हे...
Nishant Jain "shubh"
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