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मौसम...

Nishant Jain

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यार ये मौसम भी कैसे कैसे इतराता हे
        
                                                    
                            
कभी पिला कभी नीला कई रंग दिखाता हे
कभी गरजता हे तो कभी बीजली चमकाता हे
मीठी मीठी यादों संग बारिश ये बरसाता हे...
कभी ये ऐसी ठंडी पवन चलाता है,
मासूम से दिल को मेरे तड़पाता हे,
मेरी धड़कनो में धड़क रहा जो पागल,,
बार-बार उसकी याद दिलाता है...
ख़ुद तो बरसता नही मेरी आँखों को नम कर जाता हे,,,
यार ये मौसम भी कैसे कैसे इतराता हे...

Nishant Jain "shubh"

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8 वर्ष पहले
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