कैसे मान लू की तुम मेरे नही..
कैसे मान लू की मेरी पहली मोहब्बत अधूरी है..
कैसे मान लू की जिसे खुद से ज्यादा चाहा
वो किसी और की चाहत में गुम है
कैसे मान लू..की किताबों की कहानियों की
बेवफाई आज आंखों के सामने है
कैसे मान लू..की तुम किसी और के हो
कैसे मान लू..की जिसकी मोहब्बत में
मैं मुकम्मल होना चाहती हु..
वो खुद किसी की मोहब्बत में अधूरा है
काश ..हम दोनो अधूरे एक दूसरे को पूरा करते..
पर शायद किस्मत को ये मंजूर न था..
जब तुम्हारे दिल में मुझे पूरा करने की चाहत थी..
तब तक वक्त बीत चुका था..
और मैं दुनिया से बेखबर दीवानी हो चुकी थी...
काश तुमने पहले ये पहल की होती..
तो हालात ..वक्त..तुम और मैं..कुछ और होते..
कैसे मान लू..की तुम जब मेरे करीब आने के लिए तैयार थे..
तब मैं सबसे दूर जा चुकी थी..
कैसे मान लू..की मेरी मोहब्बत पूरी हो कर भी अधूरी हो गई..
कैसे मान लू..की कभी मेरे जज़्बात एक तरफा थे..
और अब तुम्हारे जज्बात एक तरफा है
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