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गीतिका

Priti Srivastava

Mere Alfaz
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                            नफरतो का जहां दिल मे पाला नही करते!
        
                                                    
                            
सभी हसीन है दिल मे शिवाला नही करते!!

कद्र न हो गर दिल मे इकरारे प्यार की!
रूठकर इस जमाने मे बवाला नही करते!!

उठा लेते सरे बज्म महफिल से यार को!
हुई रपट जो उनकी मसाला नही करते !!

हो जाती है बदनाम महफिले आबाद भी!
नजर से नजर का हवाला नही करते!!

उन्हे भी तमन्ना है रंगीन शाम की !
खामोश जुबां को बार बार टाला नही करते!!

देखकर तस्वीर उसने तोड़ा था ब्रत यार की!
खुदाया पाक को सब्र का प्याला नही करते!!

यूं तो पिघलती है शमा रात के ढल जाने पे!
खाक मे मिलकर मगर उजाला नही करते !!

सहर तो होनी ही है सहर का क्या कहना!
काली रात को मगर पाला नही करते !!

परिंदे तो चहचहायेंगे ही खुले आसमां मे!
खुशी के लिये पिंजरों मे पाला नही करते!!


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8 वर्ष पहले
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