विज्ञापन

पहला प्यार

Quantitative Aptitude

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब तुझे पहली बार देखा
        
                                                    
                            
देखते ही रह गया
इक फूल सा मन में खिला
जिससे हर अंग महक उठा
वह एक बार का देखना
देखने का सिलसिला हो चला
तुम मोनालिसा के तस्वीर जैसी
दिल में उतर चुकी थी
दिनोरात दिल में रहती
रातों की नीद उड़ चुकी थी
ना आंखों में नींद था
ना दिल में करार
ना जाने कैसा रोग था
हे मेरे सरकार
तुम्हारी एक झलक पाने को
दिल बेकरार रहता
जो तुझे देखता तो
मुझे करार मिलता
ना जाने ये कैसा आकर्षण था
जिसके बिना विकर्षण ही विकर्षण था।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
 
5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all