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उसके पीछे

Rachit Verma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं कुछ कहना चाहता हूँ उससे
        
                                                    
                            
पर कह नहीं पाता हूँ
जाता हूँ उसके पीछे
पर बिना उसके रह नहीं पाता हूँ

एक दिन वो मुझसे यूँ मूड़ बोली
करते क्यों हो तुम ऐसा
मिलता क्या है करके ऐसा
हर बार मेरे पीछे आते
देखते ही कहीं छुप जाते

अब मैं कैसे चुप रह जाता
क्या ज़वाब दूँ ये सोचता रह जाता
तब मैंने अपनी हिम्मत जुटायी
उसके सामने नज़रें उठाई
और बोला

ये जादू तुम्हारी जुल्फों का
जो मुझे खींच लाया है
तुम्हें देख कर लगता कि
कोई चाँद जमीं पर आया है

जैसे तुम कोई गुलाब की कली हो
मेरी पुरानी कोई अली हो
जैसे हरियाली देख कोई
सावन का झूला झूल गया
तुम्हें देख मैं देखो अपना
रास्ता जैसे भूल गया.....


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6 वर्ष पहले
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