मेरी जिंदगी मे बहार है
तेरा प्यार है
मेरी दुनिया मे तू वो किरदार है
जिससे प्यार है
मुझे जिन्दगी भाती नहीं
जो तू जिन्दगी में आती नहीं
मैं भटकता रहता अँधेरों में
ये रोशनी जगमगाती नहीं
मेरा दिल तेरा शुक्रगुजार है
दिया प्यार है
मैं सभी के दिल से दूर था
मेरा इतना ही कसूर था
सौदा करना प्यार का
मुझे नहीं मंजूर था
जहाँ में प्यार भी व्यापार है
कारोबार है
मेरी जिंदगी में बहार है
तेरा प्यार है
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें