जन्म पाकर धन्य हुआ
जहाँ बुद्ध,कृष्ण ,राम।
विश्वगुरु परम पुनीता,
भारत भू को प्रणाम ।।
सदाचार की गंगा बहती,
जहाँ दान यज्ञ नित्यकर्म है।
वृक्षारोपण,जलसंरक्षण,गौसेवा
ज्ञानदान जहाँ परम धर्म है।।
प्रेम,दया करुणा की शिक्षा,
मुख्य पर्व दिवाली और होली।
जहाँ संस्कृत विज्ञानसम्मत भाषा,
मैथिली सी है मधुरतम बोली ।।
जहाँ महाराणा प्रताप का बल है,
बुद्ध सा शुद्ध कोमल हृदय हो ।
हे मेरी मातृभूमि वीर प्रसूता,
विश्वमाता भारत तेरी जय हो ।।
रुपेश कुमार मिश्र
अररिया बिहार।।
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