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रचनाएँ वही सफल होती हैं

Salil Saroj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रचनाएँ वही सफल होती हैं
        
                                                    
                            
जो जीवन को जी जाती हैं
ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, तिरस्कार
सब एक घूँट में पी जाती हैं
समाज में उभरी दरारों को
सबल शब्दों से सी जाती हैं
आगे भी नई पीढ़ी के द्वारा
नाम सम्मान से ली जाती हैं
सभ्यता,संस्कृति बचने हेतु
ऐसी ही रचनाएँ की जाती हैं

- सलिल सरोज

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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