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आंखें

Suresh Pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दारुण कथा
        
                                                    
                            
कुंठित व्यथा
झरे नयन

भ्रष्ट परीक्षा
रुग्ण ममीक्षा
फटती आंखें

दृश्य उजास
मन सुहास
हंसती आंखें

विरह ज्वाल
तन कंकाल
पथरे नैन

सैनिक सोया
प्रीतम खोया
रोते लोचन

भ्रमण खास
हरित घास
चक्षु शोधन

पिया प्रदेश
नहीं संदेश
विह्वल नेत्र

पकड़ी बाहें
ठिठकी राहें
लजती आंखें

आभा उर्वशी
फूटती हंसी
तकती आंखें

मन श्रृंगार
दृष्टि बहार
अद्भुत आंखें

अरि मर्दन
क्रुद्ध प्रहार
दृग अंगार

- सुरेशपाल वर्मा जसाला
 
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करे
4 वर्ष पहले
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