मेरे पास कुछ नहीं सुनाने को
पर दिल में दबी एक कहानी है
कहते हैं लफ्जों में ताकत होती है
पर मेरे सारे हर्फ बेईमानी निकले
चले थे कारवां साथ ले कर
पर मंजिल पर पहुंचने से पहले सारे राहगीर तनहा छोड़ निकले
कहते थे जो ताउम्र साथ निभाएंगे
वो रहबर ही आज दूर खड़े दिखाई दिए
माना की आता नहीं मुझे खुद के एहसासों को दिखाना
पर कसम खुदाई की तुम्हे कभी रब्ब से कम नहीं माना
-तरुणा सिंह
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