गुनाह कचोटते, मगर अहम स्वीकार्यता नही।
हर कोई खुद को सही समझता, सही है नही।
यदि तुमने दुखाया है, दिल किसी अपने का।
वक्त हिसाब-किताब रखता, इंसान रखता नही।
यह कहावत शायद सही, कि दुनिया गोल है।
आइना बन जायेंगे तेरे लफ्ज़, तूँ माने या नही।
ओखली में सिर दिया, तो मूसरो से डरता क्यो।
जख्म आयेंगे 'उपदेश', तुम दुखी होना या नही।
उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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