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अगली पीढी

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आपाधापी में दुनिया के उसूल।
        
                                                    
                            
चुपचाप जमती देखी मैंने धूल।
खबर किये बिना मिले दो प्रेमी।
आत्मा की शान्ति करते वसूल।
हृदय ने गाये जिस सुर में गीत।
यों ही झूमने लगे बागों के फूल।
इतिहास में दर्ज मुलाकातें हुई।
अगली पीढी 'उपदेश' की मूल।

उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
 
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3 वर्ष पहले
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