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ग़ज़ल

Virendra Cholkar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोई मुझ को भी रुला कर जायेगा 
        
                                                    
                            
सोचा ना था दिल ये धोखा खायेगा 

धड़कनों ने दिल के कानों में कहा 
हम ना होंगी तू तो मारा जायेगा 

उसका मुझपर कुछ तो हक़ होगा जरूर 
गैर कोई क्यों मुझे तड़पाएगा 

- वीरेन्द्र कनक चोलकर

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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