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विज्ञापन के जरिए बेवकूफ बना हड़पे 54 लाख

ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 16 May 2014 02:17 AM IST
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अंतर्राष्ट्रीय रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन कंपनी यूनीटेक को राज्य उपभोक्ता आयोग ने धोखाधड़ी का दोषी पाया है।
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ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित कंपनी की यूनीटेक हैबीटेट योजना में आवास नहीं मिलने पर यह कार्रवाई की गई।

खरीददार की शिकायत पर कंपनी को 54,19,683 रुपए 10 प्रतिशत ब्याज दर के साथ लौटाने के लिए आदेश दिया गया है।

आयोग का कहना है कि अगर बिल्डर आवास देने में असमर्थ रहता है तो ऐसे में उसे ग्राहक हित में सोचना चाहिए।

यूनीटेक के खिलाफ लखनऊ स्थित राज्य उपभोक्ता आयोग में मेरठ निवासी राजेश कुमार अग्रवाल ने शिकायत की कि ग्रेटर नोएडा स्थित एलिस्टोनिया एस्टेट में यूनीटेक ने अपना प्रोजेक्ट लांच किया।

इसके लिए विज्ञापन में कंपनी ने विकास प्राधिकरण से जमीन खरीदने के बाद पजेशन लेकर निर्माण कार्य शुरू किए जाने की बात कही।

जून 2009 तक प्रोजेक्ट पूरा करने के कंपनी के वादे पर शिकायतकर्ता ने आवासीय अपार्टमेंट 13 जून 2006 को खरीदा।

उसे एचबीटीएन टॉवर-5 में 902 अपार्टमेंट अलॉट भी कर दिया गया। दो मार्च 2009 को अंतिम किश्त भी किसी जुर्माने से बचने के लिए जमा कर दी।

काम नहीं शुरू होने की शिकायत भी उसने कंपनी से की।

कंस्ट्रक्शन साइट का निरीक्षण करने पर शिकायतकर्ता ने पाया कि आगामी भविष्य में निर्माण की कोई संभावना वहां नहीं थी।

28 अक्टूबर 2009 को शिकायतकर्ता ने कंपनी से अपना पैसा रिफंड करने की मांग की।

कंपनी ने अपने जवाब में आयोग से कहा कि शिकायतकर्ता रिफंड पाने का हकदार नहीं है। जून 2009 में पजेशन देना प्रस्तावित था, इसके लिए कंपनी ने कोई वादा नहीं किया था।
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साइट पर काम जारी है और सिविल वर्क जल्दी ही खत्म कर लिया जाएगा। वह खुद कभी भी विजिट करने नहीं पहुंचा।

वहीं कंपनी ने शिकायकर्ता पर मकान को रीसेल करने और व्यावसायिक उपयोग के लिए बुक करने का आरोप भी लगाया।

कंपनी ने देरी के चलते विकल्प के तौर पर दूसरा अपार्टमेंट अलॉट किए जाने का भी प्रस्ताव रखा।

इस पर आयोग ने कहा कि इसके लिए कोई सबूत कंपनी ने उपलब्ध नहीं कराए कि पति और पत्नी ने अलग-अलग अपार्टमेंट बुक कराए तो इसका मतलब केवल रीसेल करने के लिए ऐसा किया।

किसी वजह से कंपनी आवास नहीं दे पाई तो उपभोक्ता को अपना पैसा वापस लेने का अधिकार है।

आयोग का आदेश
आयोग के चेयरमैन जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने अपने आदेश में कहा कि अगर बिल्डर कांट्रेक्ट को पूरा नहीं करता है। ऐसे में बिल्डर को लिबरल होना चाहिए।

बिल्डर को खुद अलॉटी से सहमति लेनी चाहिए कि वह दूसरा आवास लेना चाहेगा या फिर उसे रिफंड चाहिए। अंतिम चयन अलॉटी के ऊपर छोड़ देना चाहिए।

यूनीटेक के साथ शिकायतकर्ता के अनुबंध के नियमानुसार कंपनी को 54,19,683 रुपए मय 10 प्रतिशत ब्याज के शिकायकर्ता को रिफंड करना होगा।

वहीं 25,000 रुपए कंपनी को विधिक व्यय के लिए हर्जाना देना होगा।
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