यूपी में भाजपा सरकार आते ही सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के विवादित ढांचे के मामले में अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा, ये मामला धर्म और आस्था से जुड़ा है इसलिए ये विवाद बातचीत से सुलझ जाए तो अच्छा है।
चीफ जस्टिस जे एस खेहर ने कहा है कि अगर दोनों पक्ष राजी हो तो वो कोर्ट के बाहर मध्यस्थता करने को तैयार हैं।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर यूपी के सीएम आदित्यनाथ योगी ने काफी सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। इस मामले में दोनों पक्षों को बैठकर शांतिपूर्वक हल निकालना चाहिए।
बता दें कि 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जिसके मुताबिक अयोध्या के विवादित स्थल को रामजन्मभूमि करार दिया था।
हाईकोर्ट ने 2.77 एकड़ जमीन का बंटवारा कर दिया था। इस जमीन को तीन हिस्सों में बांटा गया था जिसमें एक हिस्सा हिंदू महासभा को दिया गया था जिसमें राम मंदिर बनना था।
दूसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया था। विवादित स्थल का तीसरा निरमोही अखाड़े को दिया गया था।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सीबीआई और हाजी महबूब अहमद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।