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बढ़ रहा है शहर में जहर के नशे का कारोबार

अभिषेक यादव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 07 Feb 2014 08:44 AM IST
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राजधानी में बुधवार को सामने आए किंग कोबरा के जहर बेचने के मामले ने एक बार फिर साबित किया है कि नशे के कारोबार में इसका कितना महत्व है। इस बारे में ‘अमर उजाला’ ने पड़ताल की तो कई सनसनीखेज जानकारियां सामने आईं।
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नशेबाजों के बीच सिर्फ जहर ही लोकप्रिय नहीं है बल्कि मदहोशी के लिए कई  दवाओं का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

जितना सोचा जा सकता है,उससे भी कहीं ज्यादा चीजों का प्रयोग नशे के लिए हो रहा है। रेव पार्टियों से लेकर लेट नाइट पार्टियों में युवा नशे के ये नए-नए विकल्प अपना रहे हैं।

नशा मुक्ति केंद्रों में पेट्रोल से लेकर पेन बाम तक से नशा करने के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। नए नशों के लोकप्रिय होने की एक प्रमुख वजह इनका आसानी से उपलब्ध होना माना जा रहा है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारी कहते हैं कि लगातार केंद्र को नए नशों की सूची भेजी जाती है।
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बावजूद इसके तुरंत कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। ऐसे में रोक लगाना मुश्किल होता जा रहा है।ड्रग रिहैबिलिटेशन से जुड़े संगठन‘दिशा’के कुमार दीपक के अनुसार सांप का जहर, कफ सिरप, नेल पेंट रिमूवर, इंक रिमूवर से लेकर पेट्रोल की गंध और पेन बाम खाकर भी लोग नशा कर रहे हैं।

अब तक प्रचलित रहे तरीकों अफीम,हेरोइन,हशीश,भांग,आदि तो जानलेवा थे ही,नए नशे नए किस्म के खतरे लेकर आए हैं। वे लखनऊ में अपने अध्ययनों के आधार पर बताते हैं कि जहां ड्रग लेने वालों में 97प्रतिशत पुरुष हैं,वहीं महिलाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।

किंग कोबरा और बिच्छू
वरिष्ठ जनरल फिजिशियन डॉ.शैलेंद्र सिंह बताते हैं कि लखनऊ में वे कई बार सांप के काटे मरीजों को देखते हैं। इनमें 2 प्रतिशत ही ऐसे होते हैं जिन्हें किसी जहरीले सांप ने काटा होता है। आमतौर पर यह पहचान मुश्किल होती है कि कौन से सांप ने काटा है ऐसे में उनके इलाज के लिए जो एंटी वेनम दिया जाता है वह कोबरा के जहर का तोड़ होता है।

डॉ.सिंह कहते हैं कि सांप काटने के बाद शरीर में शिथिलता और नींद की स्थिति आती है। ये खतरनाक है, क्योंकि इस दौरान शरीर के कुछ अंग लकवाग्रस्त भी हो सकते हैं। ऐसा ही कुछ असर बिच्छू के डंक में होता है। यही अवस्था शायद नशेड़ियों को संतुष्टि दे रही है और वे सांप से कटवाकर नशा कर रहे हैं।

पेट्रोल
ऐसे भी मामले राजधानी के नशा मुक्ति केंद्रों में आ रहे हैं, जहां लोग पेट्रोल की गंध के आदी हो चुके हैं। वे पेट्रोल में अपने रुमाल को सराबोर कर कई मिनट तक उसे नाक पर लगाकर सूंघते हैं और नशे की अनुभूति करते हैं। यह उनके दिमाग को गंभीर रूप से डैमेज कर रहा है।

कफ सिरप
फाइजर की कोरेक्स और निकोलस पीरामल की फेंसीड्रिल एक समय सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाएं हो गई थीं। इसके पीछे इनका नशे के तौर पर उपयोग होना था। इसमें मौजूद कोडीन शराब के लती लोगों को एक किक सरीखी देता।

इन हालात में फेंसीड्रिल को बैन किया गया,लेकिन कई अन्य सिरप अब भी मार्केट में उपलब्ध हैं। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट के अनुसार करीब 25 प्रतिशत कफ सिरप का इस्तेमाल नशे के लिए हो रहा है।
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