डौंडिया खेड़ा में जीएसआई रिपोर्ट व संत शोभन सरकार के दावे की असलियत
सामने आने में अब पांच फीट से भी कम दूरी बची है।
किले में 11 फीट 67 मिमी
की खोदाई हो चुकी है। खोदाई के नौंवे दिन लोहे की कील मिली है।
जीएसआई ने
भी केंद्र सरकार को भेजी रिपोर्ट में 10 से 20 मीटर क्षेत्र में पांच से 20
मीटर तक की गहराई में नॉन मैग्नेटिक धातु होने की संभावना जताई है।
बीघापुर
के एसडीएम विजय शंकर दुबे ने बताया कि नौ दिन की खोदाई पूरी हो चुकी है।
किले में एएसआई की टीम 3.35 मीटर नीचे तक पहुंच चुकी है। नौवें दिन लोहे की
एक कील मिली है।
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इस दौरान मिट्टी के टूटे बर्तन भी मिल रहे हैं। सूत्रों
के अनुसार खोदाई के दौरान मिली दो दीवारों में से एक में दीपक रखने की जगह
मिली है।
नौंवें दिन की खोदाई में शाम को जमीन में मिट्टी का घड़ा दिखा है।
एएसआई की टीम सोमवार को घड़ा निकालेगी। जीएसआई की सात पेज की रिपोर्ट में किले में 5 से 20 मीटर की गहराई में धातु होने की बात है। 5 मीटर यानी तकरीबन 16 फीट।
बुद्ध के नाखून-केश मिलने का दावा
बौद्ध भिक्षुओं और अंबेडकर महासभा के सदस्यों ने डौंडिया खेड़ा
का दौरा करके दावा किया है कि यह स्थल बौद्ध संस्कृति की विरासत है।
उसने
पुरातत्व विभाग द्वारा की जा रही खोदाई से पहले के समय में मिली प्रतिमाओं
और शिलाखंडों को बौद्धकालीन बताया है और इन्हें अपने दावे के साक्ष्य के
तौर पर पेश किया है।
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साथ ही सोने से कहीं महत्वपूर्ण चीजें जिनमें भगवान
बुद्ध के केश और नाखून शामिल हैं, मिलने की संभावना जताई है।
महासभा ने राजधानी में रविवार को एक प्रेसवार्ता में कहा कि डौंडिया खेड़ा
के लिए आयोजित यात्रा ‘तर्क और सत्य’ के दौरान वहां की एक कोठरी से बौद्ध
धम्म चक्र के अवशेष, खंडित बौद्ध व हाथी प्रतिमाएं और कई अन्य बौद्ध
शिलाखंड मिले हैं।
महासभा अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने बताया कि इन
अवशेषों की सुरक्षा के लिए उप जिलाधिकारी विजय शंकर को ज्ञापन दिया गया है।
करीब 105 वर्ष के बौद्ध भिक्षु धम्म महाथेरा तेजंकरदीप ने कहा कि जाने-
माने पुरातत्व वेत्ता एलेक्जेंडर कनिंघम ने डौंडिया खेड़ा में 200 फीट के
बौद्ध स्तूप की बात चीनी यात्री ह्वेनसांग के वर्णनों के आधार पर कही है।
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