लोहिया संस्थान के न्यूरो सर्जन ने युवक के सिर में मौजूद जन्मजात असामान्य नस से हो रहे रक्तस्राव को बंद कर उसे नई जिंदगी दी। यह सर्जरी बिना चीरा लगाए की गई है। अब युवक पूरी तरह से ठीक है। रक्तस्राव बंद करने के लिए स्क्विड (गोंद जैसे पदार्थ) का इस्तेमाल किया गया है।
आजमगढ़ निवासी 19 साल के युवक के सिर में तेज दर्द हुआ और वह बेहोश हो गया। वहां से मरीज को रेफर कर दिया गया। लखनऊ के कई चिकित्सा संस्थानों में चक्कर काटने के बाद मरीज लोहिया संस्थान पहुंचा। यहां इमरजेंसी के जरिये उसे न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. कुलदीप यादव ने देखा।
सीटी स्कैन, एमआरआई हुई, लेकिन बीमारी का पता नहीं चल पाया। फिर डिजिटल सब्स्टैक्शन एंजियोग्राफी में सिर में दाहिने तरफ खून की नसों के बीच एक नसों का असामान्य जाल (गुच्छा) दिखा। इसे एवीएम कहते हैं। यह जन्मजात होता है और उम्र के साथ बढ़ता जाता है। करीब एक लाख में किसी एक में होता है। इसी गुच्छे में एक स्थान से रक्तस्राव हो रहा था, जो दूसरी नसों को प्रभावित कर रहा था।
ऐसे में बिना चीरा लगाए जांघ के रास्ते कैथेटर नस से गुच्छे तक पहुंचा गया। वहां स्क्विड (एक तरह की गोंद) डालकर रक्तस्राव रोका गया। अब युवक स्वस्थ है। निजी अस्पतालों में इस तरह की सर्जरी में करीब आठ से 10 लाख रुपया खर्च होता है, लेकिन लोहिया संस्थान में सर्जरी 2.40 लाख में हुई।
इस टीम ने किया इलाज
सर्जरी करने वाली टीम में डॉ. कुलदीप यादव के साथ विभागाध्यक्ष डॉ. डीके सिंह, डॉ. मोहम्मद कैफ, डॉ. विपिन, डॉ. अरुण, डॉ. विपुल, डॉ. सतीश, डॉ. दिवाकर, एनेस्थीसिया से डॉ. सुजीत राय की टीम, ओटी टेक्नीशियन विपिन सहित अन्य नर्सिंग स्टाफ मौजूद रहा।