‘रन फॉर यूनिटी’ पर मोदी की खुफिया निगाहें भी लगी रहीं। उनके लिए फीडबैक जुटा रही टीम ने जगह-जगह निगाह रखी।
जानकारी के मुताबिक, सिटीजंस फॉर एकाउंटेबिल गवर्नेंस (कैग) संस्था के स्वयंसेवक सूबे में मोदी के लिए फीडबैक जुटा रहे हैं।
संस्था के स्वयंसवकों ने सभी जगह दौड़ की समीक्षा की। उन्होंने पूरी रिपोर्ट मोदी को भेजी है।
सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में न सिर्फ दौड़ में जुटे लोगों की संख्या के बारे में बताया गया है, बल्कि भाजपा नेताओं की भागीदारी व भूमिका के बारे में भी जानकारी भेजी गई है।
बसपा एमएलसी रामचंद्र प्रधान भी दौड़े
पीसीएफ के पूर्व अध्यक्ष और बसपा से एमएलसी रामचंद्र प्रधान भी ‘रन फॉर यूनिटी’ में शामिल हुए। माना जा रहा है कि वे जल्द ही औपचारिक तौर पर भाजपा में शामिल हो जाएंगे।
हालांकि प्रधान ने कहा कि यह दौड़ राजनीतिक नहीं थी, इसलिए उन्होंने इसमें हिस्सा लिया। प्रधान का नाम एनआरएचएम घोटाले में चर्चा में आ चुका है। उनसे व उनकी पत्नी से पूछताछ भी हुई थी।
झलकी गुटबाजी
लखनऊ की इस दौड़ ने एक बार फिर भाजपा की एकजुटता व तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। तमाम दावों के बावजूद अपेक्षा के अनुरूप लोग नहीं जुट पाए।
पूरे आयोजन पर हड़बड़ी इस कदर हावी दिखी कि कई नेता पटेल प्रतिमा पर माल्यार्पण करना भी भूल गए।
शहीद स्मारक पर जब नेताओं के बोलने की बारी आई तो वहां लाउडस्पीकर की व्यवस्था ही नहीं थी। हालांकि भाजपा प्रवक्ता डॉ. मिश्र ने तर्क दिया कि यह कार्यक्रम भाजपा का नहीं था।
इसीलिए इसमें वे लोग भी शामिल हुए जो भाजपा के सदस्य नहीं हैं। इस वजह से दौड़ में जुटने वाले लोगों के आधार पर भाजपा की स्थिति का आकलन करना गलत होगा।