कानपुर रैली न सिर्फ यूपी भाजपा बल्कि मोदी व पूरी भाजपा के लिए कसौटी बन गई है। हालांकि, भाजपा नेतृत्व नरेंद्र मोदी की रैली के जोरदार होने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है।
लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि देश को सात प्रधानमंत्री देने वाले उत्तर प्रदेश के लोगों का समर्थन व भरोसा हासिल करने के लिए वह क्या कुछ बोलते हैं?
जाहिर है, मोदी के भाषण से ही यह साफ होगा कि उप्र को लेकर उनके दिल-दिमाग में क्या चल रहा है। इसलिए कानपुर रैली सिर्फ भीड़ के लिहाज से ही नहीं बल्कि यूपी को लेकर मोदी की आगे की चिंता व महत्व के लिहाज से भी कसौटी बन गई है।
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इस रैली से ही सूबे में आगे होने वाली सात रैलियों के भविष्य का भी संकेत मिलेगा। इस रैली से यह भी साफ होगा कि भाजपा को सिर्फ मोदी के नाम से ही यूपी से ज्यादा से ज्यादा सीटें मिल जाएंगी या उन्हें और भी कुछ उपाय करने होंगे।
उधर, भाजपा नेतृत्व यूपी में मोदी की पहली रैली को यादगार व असरदार बनाने की तैयारी में जी-जान से जुटा है ताकि आगे की राह की पुख्ता नींव रखी जा सके।
पार्टी के प्रबंधकों की कोशिश है कि रैली के इंतजाम हैदराबाद या दिल्ली से किसी मायने में कम न हों। मोदी ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने करीब देखते व बोलते दिखाई दें, इसके लिए पूरे मैदान व आसपास 80 से 100 बड़ी-बड़ी एलसीडी स्क्रीन लगवाने की योजना है।
जिन पर पूरी रैली का लाइव प्रसारण होगा। मोदी के नजदीकी और प्रदेश प्रभारी अमित शाह खुद पूरी तैयारी पर नजर रख रहे हैं।
पूरी व्यवस्थाओं को फाइनल टच देने के लिए 10 अक्तूबर को कानपुर में रैलीस्थल गौतमबुद्ध पार्क में भाजपा के प्रमुख लोगों की बैठक बुलाई गई है।
बैठक में कानपुर के साथ बुंदेलखंड के झांसी में 25 अक्तूबर को प्रस्तावित रैली की तैयारियों को भी अंतिम रूप दिया जाएगा।
कसौटी पर मोदी
भाजपा नेता कानपुर रैली में तीन से चार लाख लोगों के आने का दावा कर रहे हैं। दावों की हकीकत का पता 19 अक्तूबर को ही चलेगा।
रैली में आने वाली भीड़ बताएगी कि मोदी के नाम की हवा यूपी में लोगों के दिल व दिमाग में पहुंच पाई है या मामला अभी सिर्फ ‘हवा’ में है।
यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि पिछले तीन चार वर्षों में कम से कम यूपी में भाजपा इतनी बड़ी संख्या में एक स्थान पर भीड़ नहीं जुटा पाई है।
इसलिए अगर रैली में वाकई तीन-चार लाख लोग आ जाते हैं तो यह साबित हो जाएगा कि मोदी में यूपी जैसे जटिल राजनीतिक समीकरण और जातिवाद से प्रभावित राज्य के समीकरणों को ध्वस्त करने की क्षमता है।
1.80 लाख वर्ग मीटर के मैदान पर रैली
पार्टी ने कल्याणपुर के पास बुद्धा पार्क के सामने जिस मैदान में रैली करने का फैसला किया है उसका क्षेत्रफल 1.80 लाख वर्ग मीटर है।
रैली की व्यवस्थाओं के लिए कानपुर में कैंप कर रहे पार्टी के प्रदेश महामंत्री स्वतंत्र देव सिंह कहते हैं कि प्रशासन से विलंब से मिली अनुमति के कारण समय की काफी कमी है। सिर्फ 10-11 दिनों में तैयारियों को पूरा करना है। लखनऊ व दिल्ली के बड़े-बड़े टेंट वालों से संपर्क साधा गया है।
मैदान और मंच
मैदान व मंच की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी को सौंपी गई है। मंच की लंबाई लगभग 200 से 250 फीट रखने का प्रस्ताव है। निर्णय मंगलवार तक हो जाएगा।
मंच तीन हिस्सों में होगा। बीच वाले मंच से मोदी रैली को संबोधित करेंगे। मैदान पर बड़े पैमाने पर होर्डिंग, बैनर व अटल-आडवाणी सहित अन्य प्रमुख नेताओं के कटआउट लगाए जाएंगे।
समस्या भी खड़ी हुई
रैली के लिए कुर्सियों व लाउडस्पीकर की व्यवस्था बड़ा सिरदर्द बन गई है। दुर्गापूजा व दशहरा के चलते टेंट वालों के यहां सामान नहीं मिल रहा। कानपुर में 50 हजार कुर्सियों का भी इंतजाम नहीं हो पा रहा है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी कहते हैं कि उनकी कोशिश कम से कम दो लाख कुर्सियां लगवाने की है।
न सिर्फ मैदान पर लाउडस्पीकर व सांउड बाक्स लगवाने का फैसला किया गया है बल्कि चारों तरफ तीन किलोमीटर के क्षेत्र में आने-जाने वालों के लिए भी लाउडस्पीकर लगाए जाएंगे।
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