अब लाल जी टंडन ने कहा है कि वह लखनऊ लोकसभा की सीट नरेंद्र मोदी के लिए छोड़ सकते हैं लेकिन राजनाथ के लिए नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें और कुछ भी नहीं पता है कि दूसरे लोग क्या चाहते हैं। उनसे अभी तक कुछ भी नहीं कहा है।
बताते चलें कि लखनऊ सीट से अटल बिहारी वाजपेयी के बाद लाल जी टंडन इस सीट से लड़ते रहे हैं।
टंडन ने खेला चुनावी दांव
माना जा रहा है कि इस तरह लालजी ने टंडन मोदी का तो स्वागत किया है लेकिन राजनाथ सिंह को उनकी औकात बताने का भी संकेत दिया है।
पार्टी में बात उठने लगी थी कि राजनाथ लखनऊ से लड़ सकते हैं। इसके तुरंत बाद टंडन ने कहा था कि वह रिटायरमेंट नहीं ले रहे हैं और वह अभी पार्टी में बने रहना चाहते हैं, लखनऊ से लड़ना चाहते हैं।
ऐसे में उनका लखनऊ सीट मोदी को ऑफर करना और राजनाथ के लिए मना करना एक सियासी दांव के तौर पर देखा जा रहा है।
मुरली का 'वाराणसी'मसला
भाजपा में टिकट पर घमासान की कहानी वाराणसी में भी छिड़ी थी जब मुरली मनोहर जोशी ने वाराणसी सीट न छोड़ने की ठान रखी थी।
हालात ने ऐसा दिलचस्प मोड़ लिया कि कभी राजनाथ सिंह के संरक्षक माने जाने वाले डॉ. जोशी ही अपने पुराने शिष्य के विरोध में मुखर हो गए।
हांलाकि हफ्ते तक चले इस ड्रामे का अंत रविवार को हो गया और मुरली ने कहा कि वह मोदी के लिए वाराणसी सीट छोड़ने को तैयार हैं।
अब क्या होगा राजनाथ का
अब जबकि लालजी टंडन ने साफ कर दिया है कि वह लखनऊ सीट सिर्फ मोदी के लिए छोड़ सकते हैं, राजनाथ के लिए नहीं। ऐसे में राजनाथ सिंह का क्या होगा।
अब वह कहां जाएंगे और कहां से चुनाव लड़ेंगे इसकी तस्वीर साफ नहीं है। बताते चलें कि राजनाथ ने शुरू से ही यह चाल चलनी शुरू कर दी थी कि वह मोदी को वाराणसी भेजें और उन्हें लखनऊ सीट मिल जाए।
ऐसे में टंडन का बागी होना भाजपा में नई तस्वीर बना रहा है।