हरिद्वार से कानपुर के बीच गंगा प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने सभी विभागों पर डंडा चलाना शुरू कर दिया है। सुनवाई के तीसरे दिन विभागीय अधिकारियों से पूछा गया कि गंगा का प्रदूषण आखिर कैसे दूर होगा। बुधवार को सुनवाई टाल दिए जाने के बाद दुबारा तलब किए गए इन अधिकारियों से प्लान बनाकर देने को कहा गया है।
गंगा में प्रदूषण की मात्रा बढ़ने की जानकारी कुछ समय पहले एक सर्वे के तहत एनजीटी को दी गई है। केंद्र सरकार की पार्लियामेंट्री बोर्ड की जांच में भी यह मामला आया था। उसके बाद से ही एनजटी ने प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों पर डंडा चलाना शुरू का दिया। पिछले दिनों केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), जल निगम और गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारियों से गंगा में गिरने वाले नालों की रिपोर्ट मांगी थी, उसमें भी गलती पाई गई थी।
उस पर भी अधिकारियों का फटकार लगी थी। अब इस मसले पर पिछले तीन दिन से दिल्ली में सुनवाई चल रही है। बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई में एनजीटी चेयरमैन स्वतंत्र कुमार ने सभी विभागों के अधिकारियों को पक्ष सुनने के बाद उनसे पूछा कि गंगा का प्रदूषण दूर कैसे किया जा सकता है। इसके लिए विभागों के पास क्या कार्ययोजना है। सभी से अपने अपने सुझाव देने को कहा गया है। करीब दो घंटे की सुनवाई के बाद शुक्रवार को सभी विभागों के अधिकारियों को फिर से बुलाया गया है।