संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्री और मार्कशीट का मामला अभी थमा भी नहीं कि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में सामने आए एक ऐसे ही मामले ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चौंका दिया है।
बनारस के विश्वविद्यालयों की डिग्रियां और मार्कशीट पश्चिम बंगाल तक बांटी जा रही हैं। जिस पाठ्यक्रम की अभी परीक्षा तक नहीं हुई, उसके भी अंकपत्र जारी कर दिए जा रहे हैं।
हाल ही में इसका खुलासा तब हुआ जब पश्चिम बंगाल के बीएड के एक विद्यार्थी ने काशी विद्यापीठ के कुलसचिव को ई-मेल के जरिये बीएड 2014 की मार्कशीट की छायाप्रति सत्यापन के लिए भेजी।
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विद्यापीठ, संपूर्णानंद की फर्जी डिग्रियां जारी करने वाले रैकेट सक्रिय
विश्वविद्यालय में बीएड 2014 की परीक्षा 12 जुलाई से होनी है। परीक्षा होने से पहले ही सत्यापन के लिए बीएड 2014 का अंकपत्र आने से कुलसचिव भी हैरान हैं।
विद्यापीठ प्रशासन अब मामले की जांच के लिए संबंधित विद्यार्थी से संपर्क करने की कोशिश में है।
पश्चिम बंगाल के जयंत सरकार नामक जिस छात्र को यह मार्कशीट मिली है, उस पर अनुक्रमांक, नामांकन संख्या के साथ ही न केवल परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर हैं बल्कि परीक्षा गोपनीय विभाग की मुहर भी लगी है।
पहले से चल रहा फर्जीवाड़े का खेल
जिस परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर इस मार्कशीट पर हैं, वह इस समय पद पर नहीं हैं। 0067467 नंबर से 20 मई 2014 को जारी की गई मार्कशीट में छात्र को द्वितीय श्रेणी से पास दिखाया गया है।
जिस तरह से यह मामला सामने आया है, उससे विद्यापीठ प्रशासन हैरान है।
विश्वविद्यालयों के फर्जी मार्कशीट और डिग्री तैयार करने का रैकेट यूपी ही नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल और बिहार तक फैला हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी समेत कुछ अन्य जिलों में ऐसे रैकेट पकड़े जा चुके हैं।
फर्जी डिग्री, मार्कशीट बनाने का रैकेट कर रहा है काम
उल्लेखनीय है कि हाल ही में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री जारी करने का मामला सामने आया था।
इस संबंध में काशी विद्यापीठ के कुलसचिव डा. साहब लाल मौर्य का कहना है कि विश्वविद्यालय की ओर से विद्यार्थियों को फोटोयुक्त मार्कशीट जारी की जाती है। बीएड की परीक्षा से पहले जारी यह मार्कशीट फर्जी है।
ऐसा लगता है कि फर्जी डिग्री, मार्कशीट बनाने का रैकेट काम कर रहा है। सत्यापन के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थी ने ई-मेल में अपना कोई पता नहीं भेजा है, बावजूद इसके विश्वविद्यालय की ओर से उससे संपर्क करने की कोशिश की जा रही है, जिससे कि इसका खुलासा हो सके।