कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे से उठे विवाद की गूंज अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर दिल्ली में सरकारी तंत्र तक पहुंच गई है।
चौतरफा आलोचना से डरी सरकार ने राहुल के बचाव में भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक अजय चड्डा को उतार दिया।
चड्डा ने बृहस्पतिवार को सफाई दी कि राहुल की वजह से जोशीमठ का गेस्ट हाउस खाली नहीं कराया गया था। बल्कि राहुल के स्पेशल प्रोटेक्शन फोर्स (एसपीजी) की सुरक्षा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए एयरफोर्स और एनडीआरएफ के दो अधिकारियों के कमरे बदलने पड़े थे।
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दरअसल इस घटना ने स्थानीय स्तर पर तूल पकड़ा लिया जब यह खबर फैली कि जोशीमठ में राहुल और उनके सुरक्षा गार्डों को ठहराने के लिए वहां स्थित आईटीबीपी गेस्ट हाउस को खाली करा दिया था। इस गेस्ट हाउस में राहत व बचाव कार्य में लगे सुरक्षाकर्मी ठहरे हुए थे।
गौरतलब है कि जिन दो सुरक्षा अधिकारियों ने कमरे बदले थे, उनकी मौत वायुसेना के हेलीकॉप्टर हादसे में हो गई। इनमें से एक वायुसेना के विंग कमांडर डारेल कास्टेलीनो हैं।
चड्डा ने पूछे गए सवाल पर कहा कि यह दोनों अलग अलग एजेंसियों के अधिकारी थे जिनके सम्मान से समझौता करने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
इन्हें आपसी सहमति के तहत सिर्फ कमरे बदलने के लिए कहा गया जिन्हें इन्होंने बिना किसी आपत्ति के स्वीकार लिया।