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अजनबियों का दिया न खाएं

राकेश Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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रेलवे में जहरखुरानों का एक बहुत बड़ा गिरोह काम करता है। इनका नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है। आमतौर पर इस नेटवर्क के लोग यात्रियों से दोस्ती करके उनके साथ निकटता बढ़ा लेते हैं। ये अक्सर अपने साथ चाय-बिस्कुट जैसी चीजें लेकर चलते हैं, जिसे आसानी से लोग एक दूसरे के साथ शेयर करते हैं। इसे खाते ही लोग अपनी सुध-बुध खो देते हैं और यह यात्री का पैसा और सामान लेकर चल देते हैं।
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पिछले साल जून महीने में अहमदाबाद से रायबरेली लौट रहे दीपक और नूतन नाम के दो भाइयों को जहरखुरानी गिरोह ने अपना शिकार बनाया था। ये दोनों साबरमती एक्सप्रेस से अपने घर लौट रहे थे। गिरोह के कुछ लोगों ने उनसे दोस्ती कर ली और चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया और इनकी साल भर की कमाई और अन्य सामान लेकर रफूचक्कर हो गये। कानपुर रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने इन्हें बेहोशी की हालत में पाया और इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया।

पिछले दिनों बिहार संपर्क क्रांति में एसी थ्री कोच में कुछ लोग वेंडर बनकर घुस गये और यात्रियों को मैंगो ड्रिंक्स देने लगे। इसे को पीते ही लोग बेहोश होने लगे। कुछ लोगों ने देख लिया और इन वेंडरों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया। ये लोग जहरखुरानी गिरोह के लोग थे जिनका कई वारदातों में हाथ होना बताया जाता है।
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