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फेडरल रिजर्व

अमर उजाला दिल्ली Updated Mon, 13 Jan 2014 07:16 PM IST
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अमेरिका का फेडरल रिजर्व सिस्टम, जिसे फेडरल रिजर्व या फेड भी कहा जाता है, इन दिनों सुर्खियों में है। इसकी मुख्य वजह यह है कि सौ वर्षों के इतिहास में पहली बार फेड के नए अध्यक्ष के तौर पर एक महिला जेनेट एलेन को चुना गया है।
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फेडरल रिजर्व अमेरिका का केंद्रीय बैंक है, जिसकी स्थापना फेडरल रिजर्व ऐक्ट के जरिये 23 दिसंबर, 1913 को वित्तीय संकटों से निपटने के लिए की गई थी। समय के साथ इसकी भूमिका में विस्तार होता चला गया। अमेरिकी संसद ने फेडरल रिजर्व ऐक्ट में मौद्रिक नीति के लिए तीन महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए हैं-अधिकतम रोजगार, स्थिर कीमतें एवं दीर्घावधि की ब्याज दर।

यह अमेरिका की मौद्रिक नीतियों का निर्धारण, अमेरिकी बैंकों की निगरानी एवं नियंत्रण का काम करने के साथ-साथ वित्तीय स्थिरता बनाए रखने एवं अमेरिकी कोषों, अमेरिका सरकार एवं विदेश स्थित अमेरिकी संस्थानों को वित्तीय सेवाएं प्रदान करने का काम करता है। फेडरल रिजर्व का ढांचा बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, फेडरल ओपेन मार्केट कमेटी, अमेरिका के बड़े शहरों में स्थित बारह क्षेत्रीय फेडरल रिजर्व बैंक, कई निजी अमेरिकी बैंक एवं कई एडवायजरी काउंसिल को मिलाकर तैयार किया गया है।
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फेडरल ओपेन मार्केट कमेटी ही मौद्रिक नीति तय करने के लिए उत्तरदायी है। फेडरल रिजर्व में निजी एवं सरकारी क्षेत्र के लोग शामिल होते हैं, ताकि आम लोगों से लेकर निजी बैंकरों के हितों की रक्षा हो सके। फेडरल रिजर्व इस मायने में भी अनूठा है कि यह मुद्रा का निर्माण नहीं करता। अमेरिकी मुद्रा यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ द ट्रेजरी बनाती है। फेडरल रिजर्व के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्यों, यहां तक कि अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव भी राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है और उसे संसद मंजूरी देती है।
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