जिस मां ने जन्म दिया और उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उसी ने कंधा देकर बेटे को अंतिम विदाई दी। देखिए, देश पर कुर्बान होने वाले एक शहीद की अंतिम यात्रा।
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जवान सुखदयाल सिंह का अंतिम संस्कार
जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा सेक्टर में आतंकियों से लड़ते हुए शहादत पाने करने वाले सेना के शहीद सिपाही सुखदयाल सिंह का पार्थिव शरीर बुधवार को पैतृक गांव समराला लाया गया। मां ने शहीद बेटे की अर्थी को कंधा दिया। इसके बाद शहीद का सैन्य सलामी के बाद अंतिम संस्कार हुआ। शहीद की तिरंगे में लिपटी हुई पार्थिव देह सुबह जब गांव समराला पहुंची तो परिवार समेत गांव के लोगों की आंखें नम थीं।
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जवान सुखदयाल सिंह का अंतिम संस्कार
शहीद की मां संतोष कुमारी की चीखें लोगों का कलेजा छलनी कर रही थी, वहीं शहीद की नवविवाहिता पत्नी पल्लवी पत्थराई आंखों से भीड़ में अपने सुहाग को तलाश रही थी। सैन्य की 59 मीडियम रेजीमेंट के जवानों ने शस्त्र उल्टे कर शहीद को सलामी दी। शहीद सुखदयाल सिंह की माता संतोष कुमारी ने अपने शहीद बेटे की अर्थी को कंधा दिया। शहीद की मां ने कहा कि उन्हें बेटे के जाने का गम तो है, मगर उसकी शहादत पर गर्व भी है।
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जवान सुखदयाल सिंह शहीद
शहीद के बड़े भाई राधे श्याम ने जब उसकी चिता को अग्नि दी तो श्मशान घाट भारत माता की जय, शहीद सुखदयाल अमर रहेके जयघोष से गूंज उठा। 21 सब एरिया के कमांडर ब्रिगेडियर संजय हुड्डा व एडम कमांडर कर्नल संजय पांडे ने भारतीय सेना प्रमुख जनरल विपन रावत की ओर से शहीद को सलामी दी। 26 वर्षीय शहीद सुखदयाल सिंह वर्ष 2013 में भारतीय सेना के 28-नेशनल राइफल्स में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। दिसंबर 2016 में सुखदयाल की शादी पल्लवी से हुई।
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जवान सुखदयाल सिंह शहीद
शहीद की मां संतोष ने बताया कि पल्लवी ने एक महीना पहले ही बेटे को जन्म दिया है, लेकिन सुखदयाल अपने बेटे का चेहरा भी नहीं देख पाए। सुखदयाल डेढ़ महीना पहले ही छुट्टी पर आया था और उसके जाने के चार दिन बाद ही बेटे का जन्म हो गया था, लेकिन सोचा नहीं था कि सुखदयाल अपने बेटे का चेहरा देखे बिना ही दुनिया से चला जाएगा। सुखदयाल बचपन से ही आर्मी में भर्ती होने की बाते करता था और कहता था कि वह देश की सेवा करेंगा और दुश्मनों को मार गिराएगा।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी घुसपैठ को रोकते हुए घायल हुए पठानकोट जिले के गांव समराला निवासी जवान सुखदयाल सिंह ने मंगलवार को दम तोड़ दिया। सुखदयाल सिंह को कुपवाड़ा में पाक आतंकियों का सामना करते हुए दस दिन पहले गोली लगी थी। तभी से दिल्ली के मिलिट्री अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। डाक्टरों ने उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन मंगलवार को सुखदयाल सिंह ने दम तोड़ दिया।