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मणिपुर हमला: भारत मां के बेटों के शव देख रो पड़ी भीड़

Updated Mon, 08 Jun 2015 12:21 AM IST
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मणिपुर में वीरवार को आतंकी हमले में शहीद हुए जम्मू के छह जवानों का सैनिक सम्मान के साथ रविवार को अंतिम संस्कार किया गया। एयरफोर्स के विशेष विमान से छह शहीदों के शव जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे। इनमें नायब सूबेदार राम सिंह (सवांखा मोड़, विजयपुर), हवलदार सतपाल भसीन (मुट्ठी, जम्मू), हवलदार रणदीप सिंह (बोमल, अखनूर), लांस नायक कुलदीप राज (बर्न, जम्मू) सिपाही विजय कुमार (सेरह, अखनूर) और हवलदार सुनील कुमार (सुंदरबनी) शामिल हैं। इसके अलावा पठनकोट के शहीद सिपाही मंजीत सिंह का शव भी यहां पहुंचा।
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उसे सड़क मार्ग से पठानकोट रवाना किया गया। सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष मेहता के अनुसार सभी शहीदों के शव देर रात जम्मू पहुंचे और सुबह सड़क मार्ग से उनके पैतृक गांव रवाना किए गए। इससे पहले स्टेशन हेडक्वार्टर जम्मू में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान टाइगर डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल दुष्यंत सिंह, एयरफोर्स स्टेशन जम्मू के एयर आफिसर कमांडिंग आशुतोष लाल और एडमिनिस्ट्रेटिव कमांडेंट कर्नल ए माथुर और अन्य उच्च सैन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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हवलदार सतपाल के अंतिम संस्कार में उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह, कुलदीप राज के संस्कार में सांसद जुगल किशोर और सुनील कुमार के संस्कार में विधायक रविंद्र रैना और ब्रिगेडियर विवेक शर्मा (डिप्टी जीओसी) उपस्थित रहे। जीओसी मेजर जनरल कुलप्रीत सिंह शहीद हवलदार रणदीप सिंह के संस्कार में शामिल हुए।

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सैन्य सम्मान के साथ शहीद सुनील की अंत्येष्टि

सुंदरबनी। मणिपुर में वीरवार को उग्रवादियों द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंग के विस्फ ोट में शहीद हुए सुनील कुमार शर्मा का सुंदरबनी के फल गांव के श्मशान घाट पर पूरे सैनिक सम्मान के साथ रविवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। सुबह करीब साढ़े नौ बजे के करीब जैसे ही तिरंगे में लिपटा हुआ शहीद के शव को लेकर सेना की कालीधार ब्रिगेड के अधिकारी गंाव में पहुंचे तो पूरे गंाव में चीख-पुकार के साथ लोगों को शहीद सुनील कुमार शर्र्मा अमर रहें के नारे लगाने लगे। शव को जैसे ही वाहन से उतारकर घर के अंदर ले जाया गया तो शहीद के पिता रमेश चंद्र, माता विमला देवी, पत्नी रितु देवी तथा दादी धानो देवी ताबूत के साथ चिपक कर बेहोश होकर गिर गईं, जिन्हें रिश्तेदारों को संभालने में मशकक्त करनी पड़ी, लेकिन शव के क्षत-विक्षत होने के कारण ताबूत को न खोलने के चलते शहीद सुनील के अंतिम दर्शन भी नहीं हो सके । लिहाजा उन्हें ताबूत के ऊपर रखे सुनील कुमार के फोटो के दर्शन करने पड़े। करीब एक घंटे तक शव को घर में रखने के बाद घर से कुछ दूर स्थित श्मशान घाट पर ले जाया गया जहां सेना की 4-5 जीआर की टुकड़ी ने शहीद को हवाई फायर करके सलामी दी। शहीद के शव का अंतिम संस्कार उसके बड़े बेटे सुमित कुमार ने किया। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, राजनीतिक दलों तथा प्रशासनिक अधिकारी भी अंतिम विदाई देने पहुंचे।
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शहीद कुलदीप का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

दोमाना। मणिपुर की मोलतुक घाटी में 4 जून को आतंकियों ने सेना के काफिले पर हमला कर 18 जवानाें को शहीद कर दिया था। इनमें जम्मू-कश्मीर राज्य के छह जवान भी शहीद हुए थे। ब्लाक भलवाल की पंचायत बरन के लांस नायक कुलदीप राज और मुट्ठी के हवलदार सतपाल भसीन शहीद हुए हैं। रविवार को दोनों के शवों का सैन्य समान के साथ अंतिम संस्कार सैन्य सम्मान के साथ किया गया। शहीद कुलदीप को सिंबलवाला श्मशानघाट पर उनके बड़े भाई के बेटे राजकुमार ने मुखाग्नि दी। सुबह आठ बजे शहीद कुलदीप राज का शव जैसे ही उनके घर बरन में पहुंचा तो सभी ओर लोगों का तांता लगा हुआ था। सारा गांव शहीद के घर पहुंच परिवार के दुख में शरीक हो गया। शहीद की मां शांति देवी बेटे के शव को देख बिल्कुल टूट चुकी थी। हालांकि उसे अन्य महिलाएं ढांढस बंधाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वह रह-रह कर शहीद कुलदीप से उसे भी साथ ले जाने की मांग कर रही थी। पत्नी गायत्री देवी का तो मानो सब कुछ लुट गया। वह बदहवास कभी कुलदीप के शव और कभी अढ़ाई वर्षीय बेटी शगुन को देखती। शगुन ने तो अभी पापा कहना और पहचानना ही सीखा था। बहनों का भी रो-रो कर बुरा हाल था। श्रद्धांजलि देने वालों में सांसद जुगल किशोर शर्मा, वन और पर्यावरण मंत्री बाली भगत, 19 ब्रिगेड के ब्रिगेडियर प्रबीर पारिख, डीआईजी जम्मू अशकूर वानी, एसडीएम नार्थ डा. पियूष सिंगला के अलावा विभिन्न सामाजिक और सियासी पार्टियों से जुडे़ लोग शामिल थे।
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हवलदार रणदीप को भतीजे ने दी मुखाग्नि

अखनूर। शहीद रणदीप सिंह का सैन्य सम्मान के साथ भोमाल गांव में अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले सुबह के समय जब हवलदार रणदीप सिंह का शव सेना के वाहन से पहुंचा, तो गांव में शोक की लहर दौड़ गई। हर आंख जांबाज सपूत की शहादत पर नम थी। मां राज कुमारी, पत्नी रानी देवी के अलावा बेटी प्रियंका और जाह्नवी का रो रोकर बुरा हाल था। नहर के पास करीब साढ़े दस बजे सैन्य सम्मान के साथ शहीद हवलदार रणदीप सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। भतीजा गौरव सिंह ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर मेजर जनरल कुलप्रीत सिंह, विधायक राजीव शर्मा, राज्य मंत्री दलजीत सिंह, एसडीएम सुरेश चंद सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता मौजूद रहे। शहीद के बड़े भाई बलवीर सिंह ने बताया कि रणदीप छह जून को छुट्टी लेकर घर आने वाले थे। नए घर में शिफ्ट होने की योजना थी।
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सैन्य सम्मान के साथ विजय को अंतिम विदाई

ज्यौड़ियां। पंचायत सेड़ के गांव चमारकी निवासी शहीद विजय कुमार शर्मा उर्फ विक्की का शव रविवार सुबह नौ बजे के करीब पहुंचा। जैसे ही सेना के जवानों ने विजय का शव वाहन से उतार कर घर की ओर चले, तो परिवार के सदस्यों में चीख-पुकार मच गई। बेटे का शव देख पिता दीवान चंद का बुरा हाल था। मां भी बेसुध हालत में थीं। बार-बार बेहोश हो रही थीं। होश आते ही विजय-विजय पुकारने लगतीं। वह कहतीं, बेटा उठ। मै तेरे बिना कैसे जी पाउंगी। विजय की पत्नी सोनाली शर्मा भी रोये जा रही थीं। वह कहतीं, मम्मी उनके साथ ऐसा नहीं हो सकता। यह दृश्य देख सभी की आंखें नम हो गईं। कोई कुछ कहने की स्थिति में नहीं था। बस एक-दूसरे को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे थे। शहीद विजय शर्मा का अंतिम संस्कार सेड़ के शमशानघाट पर सैन्य सम्मान के साथ किया गया। इस मौके पर जीओसी आरएस बहादुरिया सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सेना के ग्रेनेडियर शाखा के लेेफ्टिनेंट कर्नल संजय बारिया, नागा शाखा के लेफ्टिनेंट कर्नल कुलकर्णी, विजय की यूनिट के लेफ्टिनेंट कर्नल संजीव डडवाल और जैकलाई की 11वीं शाखा के सूबेदार मनमोहन सिंह सहित अन्य अधिकारी और जवानों ने श्रद्धांजलि दी। शहीद विजय को मुखाग्नि उनके भतीजे ने दी। जानकारी के अनुसार वीरवार को जब हमला हुआ, तो विजय शर्मा ने उक्त वाहन से बाहर निकल मुकाबला करने के लिए आड़ लेने वाले थे कि दुश्मन की गोली उनकी पीठ में लगी। विजय यूनिट के होनहार जवानों में से थे। उन्होंने खेल के कई मुकाबलों में भी बाजी मारी। विजय को सेना में भर्ती हुए अभी दस साल भी नहीं हुए थे। उन्होंने वर्ष 2006 में सेना में भर्ती हुए थे। खड़ाह हाई स्कूल से दसवीं पास करने के बाद वह सेना में भर्ती हुए। उनकी यह इच्छा बहुत पहले से थी। दौड़ में कई ईनाम भी जीत चुके हैं।

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राम सिंह का शव देखते ही बेहोश हुई बहन

विजयपुर/नंदपुर। स्वांखा मोड़ निवासी पूर्व सैनिक बाबू राम के बेटे राम सिंह का रविवार को देविका में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर गणमान्य लोगों के अलावा भाजपा नेता एवं उद्योग मंत्री मंजीत सिंह के अलावा राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी श्रद्धांजलि दी। मणिपुर में शहीद हुए राम सिंह का तिरंगे में लिपटा हुआ शव जैसे ही स्वांखा मोड़ गांव पहुंचा, तो सबकी आंखें नम हो गईं। परिवार में चीख-पुकार का माहौल बन गया। बहन भाई के शव देखते ही बेहोश हो गई। शहीद की पत्नी मधुबाला का तो रो-रोकर बुरा हाल था। वहीं पिता बाबू राम भी बेसुध हालत बस बेटे के शव को देखे जा रहे थे। दो मई 1976 को जन्मे राम सिंह की प्राथमिक शिक्षा नंदपुर में हुई थी। वह 1994 में सेना में भर्ती हुए थे। परिवार के अनुसार राम सिंह में बचपन से देश सेवा के प्रति प्रेरित थे। दूसरों की सेवा करने में भी वह आगे रहते थे। खेलों के प्रति लगाव होने का ही नतीजा था कि नौकरी के दौरान भी वह खेल में अव्वल आते रहे। पिता बाबू राम का कहना है कि बेटे की शहादत पर उन्हें फर्क है।

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बेटे की शहादत पर पूर्व सैनिक पिता को गर्व

दोमाना। मुट्ठी स्थित शमशान घाट पर मनिपुर की मोलतुक घाटी में आतंकी हमले में शहीद हुए 6 डोगरा रजिमेंट के हवलदार सतपाल भसीन का अंतिम संस्कार सैन्य समान के साथ कर दिया गया। इस मौके पर शहीद के नौ वर्षीय बेटे आयूष (वंश) जिसने अभी पिता की अंगुली पकड़ बहुत कुछ सीखना था ने मुखाग्नि दी। हजारों की संख्या में लोग शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। इस मौके पर राज्य के उप मुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह, सांसद जुगल किशोर शर्मा, वन मंत्री बाली भगत, विधायक सत शर्मा (सीए) शिक्षा राज्य मंत्री प्रिया सेठी, भाजपा नेता युद्धवीर सेठी, आईजी जम्मू दानिश राणा, जिला आयुक्त जम्मू सिमरन जीत सिंह, 19 ब्रिगेड़ के कमांडर ब्रिगेडियर परबीर पारिक के अलावा सेना और सिविल सोसाइटी के लोगों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी। मुट्ठी बाजार सैनिक के सम्मान में बंद रहा। सेना की गाड़ियां तिरंगे में लिपटे शहीद के शव को लेकर सुबह आठ बजे के करीब मुट्ठी पहुंची। सभी ने नम आंखों से शहीद के अंतिम दर्शन किए। पिता बिशन दास के अलावा भाई कुलदीप और सुरेश का बुरा हाल था। दिल के मरीज पिता बिशन दास को संभालना मुश्किल हो रहा था। शहीद की पत्नी रीता का तो मानो सब कुछ लुट गया था। चौथी कक्षा में पढ़ने वाला बेटा आयुष घर में आए इतने सारे लोगों को देख सहम गया था। शहीद हवलदार सतपाल के पिता पूर्व नायब सूबेदार बिशन दास का कहना था कि उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व है। उसने देश के लिए अपनी कुर्बानी देकर न सिर्फ उनका नाम रोशन कर दिया बल्कि अन्य के लिए भी मिसाल बन गया है। उन्होंने बताया कि सतपाल का बेटा, जो कि चौथी कक्षा का छात्र है, पढ़-लिख कर फौज में जाएगा और देश सेवा में योगदान देगा। यही शहीद को श्रद्धांजलि होगी।

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जम्मू लाए गए शहीदों के शव

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शहीदों के शवों को पहले सैन्य कैंप में रखा गया।

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यहां शहीदों को सेना के अधिकारियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

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शहीद सतपाल के मासूम बेटे ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया।

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शहीद सतपाल का शव देखकर रोते बिलखते हुए उनके प‌िता।

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शहीद रणदीप के शव को देखकर बच्चों का कलेजा भी फट पड़ा।

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शहीद रणदीप के शव को देखकर विलाप करते परिजन।

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शहीद रणदीप के शव को अंतिम क्रिया के लिए ले जाते लोग।

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शहीद सतपाल को श्रद्धांजलि देते उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह।

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शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए सेना के जवान।

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शहीद कुलदीप राज को श्रद्धांजलि देते भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जुगल किशोर।

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शहीद कुलदीप राज को श्रद्धांजलि देते मंत्री बाली भगत।

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शहीद कुलदीप राज के शव को कंधा देते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जुगल किशोर।

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