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श्री अमरनाथ यात्रा के आखिरी दस दिन होंगे सबसे मुश्किल

ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना Updated Mon, 21 Jul 2014 09:57 PM IST
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श्री अमरनाथ में पवित्र शिवलिंग के दर्शन करने जाने वाले यात्रियों को यात्रा संपन्न होने से दस दिन पहले काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
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इसका कारण है यात्रा संपन्न होने से दस दिन पहले मंजूरी समाप्त होने के कारण यात्रा मार्ग पर लगने वाले अधिकतर भंडारे वालों का लौट आना। भंडारे वालों को जम्मू कश्मीर सरकार की तरफ से 27 से तीस जुलाई तक की अंतिम तारीख मिली है। उसके बाद वह वहां पर भंडारा नहीं लगा पाएंगे।


लिहाजा तीस जुलाई के बाद उन्हें वहां से निकलना पड़ेगा। इसके बाद यात्रा करने जाने वाले यात्रियों को कुछ ही भंडारे मिलेंगे या फिर यात्रियों को वहां पर टेंट लगा कर बैठे स्थानीय लोगों की मनमानी का शिकार होना पड़ेगा। यात्रियों को बहुत ज्यादा पैसा देकर वहां स्थानीय लोगों द्वारा लगाए टेंट में रहना पड़ेगा। यही बात पिछली बार भी झगड़े का कारण बनी थी।
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श्री अमरनाथ यात्रा भंडारा आर्गेनाइजेशन के सदस्य हनुमानगढ़ स्थित बर्फानी सेवा दल के प्रधान बलदेव कुमार ने कहा कि इस बार यात्रा 28 जून से शुरू होकर दस अगस्त तक संपन्न होने की तारीख तय की गई थी। हर बार यात्रा के दौरान भंडारा लगाने की मंजूरी पूरी दी जाती है, लेकिन इस बार जम्मू कश्मीर सरकार ने अधिकतर भंडारा संचालकों को तीस जुलाई तक की मंजूरी दी है।



यात्रा संपन्न होने से दस दिन पहले तक वहां पर कुछ ही भंडारे रह जाएंगे। इससे अंतिम दस दिन में यात्रा करने वाले यात्रियों को काफी परेशानी होगी। तीस जुलाई के बाद अधिकतर भंडारा संचालक वहां से चले जाएंगे। जिस हिसाब से लाखों यात्री वहां पर रोजाना जा रहे थे, उस हिसाब से वहां मौजूद रहने वाले भंडारे कम पड़ जाएंगे। लोगों को भंडारों के अंदर रहने की भी जगह नहीं मिलेगी। स्थानीय लोगों द्वारा टेंट के अधिक पैसे वसूले जाएंगे और खाने के सामान के भी मनमाने पैसे वसूले जाएंगे। बलदेव कुमार ने कहा कि भंडारे चले जाने के बाद स्थानीय लोगों द्वारा पहले जिस टेंट के 200 रुपये प्रति यात्री के हिसाब से लिए जाते हैं वही बाद में पांच सौ से एक हजार रुपये तक प्रति यात्री टेंट कर दिया जाएगा। मजबूरी में यात्री को रात बिताने के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे।



अधिक पैसे वसूलने को लेकर हुई थी झड़प
बालटाल में यात्री और स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए टेंट के अधिक पैसे वसूलने के दौरान एक भंडारे के अंदर बहस चल रही थी। इसी दौरान भंडारे के अंदर सेवा कर रहे एक सेवादार ने उन्हें बाहर जाकर बहस करने को कहा तो स्थानीय लोगों और भंडारा सेवादार के बीच कहासुनी हो गई, पहले तो लोगों ने बीच बचाव करा दिया, लेकिन बाद में स्थानीय लोगों द्वारा एक लाइन में लगे नौ भंडारों में तोड़फोड़ कर आगजनी कर दी गई।



तीन दिन भंडारे बंद होने से यात्रियों को हुई थी खासी परेशानी
बर्फानी सेवा दल के प्रधान बलदेव कुमार ने कहा कि बालटाल में स्थानीय लोगों द्वारा भंडारे के अंदर घुस कर तोड़फोड़ करने और वहां पर आग लगाकर पूरे भंडारे को क्षतिग्रस्त करने की घटना के तुरंत बाद वहां से भंडारा संचालकों ने लंगर को पूरी तरह से बंद कर दिया था। इससे यात्रियों को खूब परेशानी हुई थी। यात्रियों को कुछ खाने को नहीं मिल रहा था। स्थानीय लोग यात्रियों से मनमाने पैसे वसूल कर रहे थे।



भंडारे वाले तो घटना के बाद वापस आने लगे थे, लेकिन सीआरपीएफ और बीएसएफ के सुरक्षा संभालने के बाद और यात्रियों की कठिनाईयों को देखते हुए दोबारा से भंडारे शुरू कर दिए गए। उन्होंने कहा कि अब अधिकतर भंडारों की अवधि ज्यादा से ज्यादा तीस जुलाई तक है। उसके बाद फिर से यात्रियों को परेशानियां झेलनी पड़ेगी।
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