अमृतसर। जानी मानी शिपिंग कंपनी ‘जैईसू शिपिंग’ पर छाया विवादों का साया हटने का नाम नहीं ले रहा है। कंपनी के एक और जहाज कमल-26 में 33 लोगों के फंसने का मामला प्रकाश मेें आया है। जहाज में फंसे लुधियाना निवासी रेडियो आफिसर रुपिंदर सिंह ने अखिल भारतीय ह्यूमन राइट्स आर्गेनाइजेशन को पत्र लिख कर अपनी और अपने साथियों की जान बचाने की गुहार लगाई है। रुपिंदर के मुताबिक वह लोग कई दिनों से समुद्र में फंसे हुए हैं और भूखे-प्यासे मरने को मजबूर हैं।
26 भारतीय और सात विदेशी फंसे :
अबहरो के सेक्रेटरी हवा सिंह तंवर को भेजे ई मेल में रुपिंदर सिंह ने लिखा है कि उनका जहाज मुंबई समुद्र के बीच पांच किलोमीटर दूरी पर फंसा हुआ है। जहाज में न तो ईंधन है और ना ही खाने-पीने की सामग्री। अपने पत्र में रुपिंदर ने आरोप लगाया है कि आज से करीब एक महीने पहले कंपनी की तरफ से राशन-पानी भेजा गया था, जो सिर्फ दस दिन के लिए काफी था। ईंधन न होने के कारण जहाज ब्लैक आउट में है। आठ महीने से दवा नहीं मिलने से बीमार लोगों गंभीर हालत में है। पिछले पांच महीने से किसी को वेतन भी नहीं दिया गया है। उन्होंने बताया कि जहाज में 26 लोग भारतीय और सात यूक्रेन के हैं। तंवर ने बताया कि रुपिंदर ने कई जगहों पर मदद की गुहार लगाई मगर कहीं से भी सुनवाई नहीं हुई। आखिर में हारमान कर उसने अबहरो से संपर्क साधा है।
इस कंपनी का जहाज कमल-40 पहले ही विवादों में रहा। इसमें 36 लोग शामिल थे, जिसमें अमृतसर के मेजर सिंह समेत पांच पंजाबी थे। तंवर ने बताया कि यह मामला भी उनके पास आया था। इसके बाद दबाव बनाया गया और मेजर सिंह घर लौट सका। अप्रैल महीने की इस घटना के बाद मई महीने के तीसरे हफ्ते में इसी कंपनी के जहाज कमल-36 के क्र्यू मेंबरों ने भी ऐसे ही अबहरो के पास शिकायत की थी। उक्त जहाज में 31 भारतीयों समेत 39 लोग फंसे हुए हैं। इसमें आठ यूक्रेन के और दो पठानकोट के लोग शामिल हैं। यह शिकायत उक्त जहाज के रेडियो आपरेटर पठानकोट के जसपाल सिंह ने की थी।
तंवर ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि कंपनी की जहाज में फंसे हरेक व्यक्ति की जिंदगी को बचाने के लिए अबहरो ने केंद्रीय शिपिंग मंत्री जीके वासन, केेंद्रीय राज्य शिपिंग मंत्री मिलिंद मुरली देवड़ा, केंद्रीय सचिव प्रदीप कुमार सिन्हा और शिपिंग महानिदेशक को पत्र के जरिए सारी स्थिति से अवगत करवाया है। इसके साथ ही यूक्रेन अंबेसी को भी इस बाबत पहल करने की मांग की गई है। उनका कहना है कि अगर सरकार ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो संगठन इन लोगों को छुड़ाने के लिए अदालत की भी शरण लेगा। इस मौके पर राजन बब्बर, राज कुमार खोसला, के. एस. मठारु मौजूद थे।