फरीदकोट। सरकारी बरजिंदरा कालेज में दाखिले को लेकर संघर्ष कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के बाद शनिवार को भी जिला प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच तनाव की स्थिति रही। पुलिस प्रशासन ने कालेज में डेरा जमाए रखा जबकि पंजाब स्टूडेंट यूनियन के नेता अगली रणनीति बनाने में जुटे रहे।
शुक्रवार की घटना के कारण सरकारी बरजिंदरा कालेज में सन्नाटा छाया रहा। पुलिस की ओर से कालेज में सिर्फ रेगुलर विद्यार्थियों को घुसने की आज्ञा दी गई। दाखिले संबंधी अपनी स्थिति के बारे में जानने के लिए पहुंचे विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों को पूछताछ व तलाशी के बाद ही अंदर जाने दिया गया। वहीं दूसरी तरफ शुक्रवार को लाठीचार्ज के दौरान धरना स्थल से पकड़े गए 19 छात्र-छात्राओं में से 13 छात्रों को जिला पुलिस ने एसडीएम के आदेश पर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है, जबकि छह छात्राओं को पुलिस ने रेड क्रास के शार्ट स्टे होम में नजरबंद किया गया। हालांकि शनिवार शाम प्रशासन ने इन छात्राओं को रिहा कर दिया, लेकिन उन्होंने स्टे होम के बाहर धरना शुरू करते हुए जिला पुलिस प्रशासन व कालेज प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पंजाब स्टूडेंट यूनियन के प्रांतीय नेता राजिंदर सिंह ने शांतिपूर्वक धरना दे रहे विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज की निंदा की।
44 सीटों के लिए 796 आवेदन
स्टाफ की कमी से जुझ रहा है बरजिंदरा कालेज
फरीदकोट। सरकारी बरजिंदरा कालेज में स्टाफ की कमी के कारण विभिन्न पाठ्यक्रमों की सीटें में भी कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। ऐसे हालात में दाखिले को लेकर विवाद खड़ा होना स्वाभाविक है।
इस वर्ष सरकारी बरजिंदरा कालेज में बीए की 616 सीटों के लिए 1403, बीकॉम की 66 सीटों के लिए 219, बीएसई मेडिकल की 66 सीटों के लिए 109, बीएसई नान मेडिकल की 66 सीटों के लिए 370, एमए पंजाबी की 44 सीटों के लिए 120 व एमएसई केमिस्ट्री की 33 सीटों के लिए 45 विद्यार्थियों ने आवेदन भरे हुए हैं। सबसे विकट स्थिति बीएसई खेतीबाड़ी की मात्र 44 सीटों को लेकर है, जिसके लिए सबसे अधिक 796 आवेदन पहुंचे हुए हैं और मेरिट 82.5 प्रतिशत पर खड़ी है। पिछले कुछ वर्षों से लगातार कालेज स्टाफ में हो रही लगातार कमी के कारण भी सीटों की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है, जबकि पढ़ने वाले विद्यार्थियों का आंकड़ा बढ़ रहा है। नई भर्ती न होने के कारण राज्य सरकार ने कालेजों को पीटीए फंड से ठेके पर स्टाफ रखने की आज्ञा दी हुई थी और उसका सारा आर्थिक बोझ विद्यार्थियों पर ही डाला जाता है।