फरीदकोट। फरीदकोट की माडर्न जेल में सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में एक और विचाराधीन कैदी की मौत पर भड़के कैदियों ने जमकर बवाल किया और पुलिस पर पथराव किया। हालात काबू करने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग और लाठीचार्ज करना पड़ा। साथ ही आंसू गैस के गोले भी दागे। इस झड़प में दो पुलिस कर्मियों समेत जेल के छह कर्मचारी घायल हुए, जबकि घायल कैदियों के बारे में जेल प्रशासन ने कोई जानकारी नहीं दी। इस जेल में इस सप्ताह में ही यह तीसरी मौत है। वहीं, 26 मार्च से अब तक पांच विचाराधीन कैदी रहस्यमयी तरीके से दम तोड़ चुके हैं। आईजी जेल ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। मृतक की पहचान मुक्तसर के गांव अरनीवाला निवासी हरसा सिंह के तौर पर हुई है और उस पर एक दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज थे। उसे 19 अप्रैल को ही मुक्तसर जेल से फरीदकोट शिफ्ट किया गया था। पहले ही जेल में सुविधाओं की कमी को लेकर रोष जता रहे कैदियों को जब इस मौत की जानकारी मिली तो वे तोड़फोड़ पर उतारू हो गए।
भड़के कैदियों ने जेल प्रशासन को हरसा सिंह का शव भी नहीं उठाने दिया। सूचना मिलने पर जेल अधीक्षक जेपी सिंह अन्य पुलिस कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे तो कैदियों ने उन पर पथराव कर दिया। साथ ही जेल के रिकार्ड रूम को आग लगा दी और कैंटीन और मेस में तोड़फोड़ की। पथराव में जेल के एसआई अमरीक सिंह, ड्राइवर प्यारा सिंह समेत करीब छह कर्मी घायल हुए।
मोगा और बठिंडा से भी पुलिस बल मंगवाना पड़ा। उपद्रव की सूचना मिलने पर डीसी रवि भगत, एसएसपी गुरप्रीत सिंह तूर, बठिंडा रेंज के आईजी प्रमोद बान, मोगा के एसएसपी सुरजीत सिंह ग्रेवाल भारी पुलिस फोर्स के साथ फरीदकोट जेल पहुंचे। पहले कैदियों को लाठीचार्ज कर खदेड़ने का प्रयास किया गया, पर जब बात नहीं बनी तो हवाई फायर और आंसू गैस के गोले दागे गए। इस पर कैदी भागकर बैरकों में घुस गए और खुद को अंदर से बंद कर लिया। डीसी रवि भगत ने कार्रवाई का भरोसा देकर बैरकें खुलवाईं। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका। इसी बीच जिला व सेशन जज अर्चना पुरी और सीजेएम डॉ. रजनीश भी जेल पहुंचे।