कोई एफआईआर दर्ज नहीं
थाना प्रभारी गुरिंदरजीत सिंह नागरा ने बताया कि अर्शदीप सिंह और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अर्शदीप को केवल एहतियाती कदम के तौर पर हिरासत में लिया गया था ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोका जा सके। उन्होंने बताया कि आरोपी को कार्यकारी मजिस्ट्रेट/तहसीलदार की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब उसे दो जून को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि पुलिस की रोजनामचा रिपोर्ट में आम आदमी पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘झाड़ू’ की कथित “बेअदबी” का उल्लेख किया गया है। आमतौर पर ‘बेअदबी’ शब्द धार्मिक प्रतीकों या धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में प्रयोग किया जाता है, लेकिन इस मामले में इसका इस्तेमाल एक राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह के संदर्भ में किया गया है।
परिवार ने सिरे से खारिज किए आरोप
अर्शदीप सिंह के परिवार ने पुलिस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अर्शदीप के चाचा बलवीर सिंह और चाची परमिंदर कौर ने बताया कि वह केवल विजयी उम्मीदवार और उसके समर्थकों के साथ खुशी मना रहा था तथा उसके हाथ में लोगों में बांटने के लिए लड्डुओं के पैकेट थे। उन्होंने कहा कि अर्शदीप ने न तो कोई झाड़ू तोड़ी, न फेंकी और न ही किसी उम्मीदवार के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
परिवार का आरोप है कि पुलिस ने अर्शदीप को रेलवे स्टेशन के नजदीक स्थित उनकी पुस्तक दुकान से हिरासत में लिया। उन्होंने उसे एक शांत, सभ्य और कानून का सम्मान करने वाला युवक बताते हुए कहा कि उसे गलत तरीके से इस मामले में फंसाया गया है।
अब यह मामला 2 जून को अदालत में फिर सुनवाई के लिए आएगा।
कांग्रेस का प्रदर्शन
इस कार्रवाई के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दलजीत सिंह गिलजियां की अगुवाई में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने थाना टांडा के बाहर धरना प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने अर्शदीप सिंह की गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार देते हुए पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि चुनाव में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार की जीत के बाद राजनीतिक दबाव में आकर निर्दोष युवकों को निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अर्शदीप के खिलाफ कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं है, फिर भी उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। कांग्रेस ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए अर्शदीप की तत्काल रिहाई की मांग उठाई।