मोहाली। डायबेटिक फुट के मरीजों को सही जानकारी देने और समय पर इलाज शुरू करने से बढ़िया नतीजे मिले हैं। पैर काटने की नौबत वाले मामलों में एक-दो साल में ही 90 फीसदी कमी आई है। यह जानकारी फोर्टिस अस्पताल में वस्कुलर सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. रावुल जिंदल ने वस्कुलर-डे पर दी।
उन्होंने बताया कि शुगर रोगियों में डायबेटिक फुट और गैंगरीन इन्फेक्शन की आशंका रहती है। जिसके चलते पैर गंवाने का भी खतरा रहता है। ऐसे में खास सावधानी बरतने की जरूरत है। आर्टीरियल ब्लॉकेज में एंजियोप्लास्टी या बाईपास कारगर इलाज हैं, जिनसे पैर बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पैर के पंजे पर नजर आने वाले कालेपन से न सिर्फ पैर काटने की नौबत आ सकती है, बल्कि दिल की बीमारियों की शुरूआत भी हो सकती है। इसकी वजह पेरिफरल आर्टरी डिसीज, बुढ़ापा, स्मोकिंग, शुगर, हाई-कोलेस्ट्रॉल, हाइपरटेंशन आदि हो सकते हैं। लक्षणों में चलने-फिरने के दौरान काफ या थाई मसल्स में दर्द शामिल है। समय पर पता नहीं लगने से पैर काटने तक की नौबत आ जाती है। परंतु डायबेटिक फुट में एंजियोप्लास्टी कारगर इलाज है, समय पर मरीज आ जाए तो पैर कटने से बचाया जा सकता है। डॉ. जिंदल ने कहा कि वेरिकोज वेन्स जैसी समस्या का इलाज भी एक घंटे में संभव है। इसमें दर्द कम होता है और रिकवरी जल्द।