पंजाब की जेलों में ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए केंद्रीय बलों की सुरक्षा के मामले पर केंद्र सरकार ने अपने हाथ खींच लिए हैं।
हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान ड्यूटी को हैंडल करने के लिए बीएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी में भी फोर्स की भारी कमी चल रही है।
लिहाजा पंजाब की जेलों में केंद्रीय बलों की सुरक्षा मुमकिन नहीं है। केंद्रीय गृह विभाग के संयुक्त सचिव एस. सुरेश कुमार द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे में सुझाव दिया है कि इस मामले में पंजाब सरकार पड़ोसी राज्यों की मदद ले सकती है।
चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अरुण पल्ली पर आधारित खंडपीठ ने हलफनामे को रिकार्ड में ले लिया।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने ड्रग्स तस्करी के आरोपी पुलिस अधिकारियों और मुलाजिमों पर कार्रवाई के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
एफिडेविट को पढ़ने के बाद खंडपीठ ने कहा कि इस हलफनामे को पढ़कर यह साफ लग रहा है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे से अपने हाथ साफ रखना चाहती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि जेलों में नशों की तस्करी एक गंभीर मामला है और एक दूसरे पर इस मामले को थोपना बिल्कुल ठीक नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर तिहाड़ जेल के बाहर तमिलनाडु पुलिस की तैनाती की बात सही है, तो पंजाब को दूसरे राज्यों या फिर पड़ोसी राज्यों से मदद लेनी चाहिए, ताकि जेलों के आउटर सर्कल में बाहरी पुलिस मुलाजिमों को तैनात किया जा सके।
इससे लोकल इंटरेस्ट भी दूर किया जा सकेगा और भाषा भी एक बैरियर के रूप में उभर कर सामने आएगी। मामले की सुनवाई के दौरान याची पक्ष के वकील ने दलील दी कि पुलिस ने ड्रग्स आपूर्ति के मामले में जिन पुलिस अधिकारियों और पुलिस मुलाजिमों को पकड़ा है।
उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकी है। याची पक्ष को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश जारी किए कि कोर्ट को बताया जाए कि ऐसे कितने पुलिस अधिकारी और पुलिस मुलाजिम हैं और इनके खिलाफ अभी तक क्या एक्शन लिया गया है।
हाईकोर्ट ने मामले की आगामी सुनवाई 24 फरवरी के लिए निर्धारित की गई है।