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तरसेम से किसे फायदा और किसे नुकसान!

Shimla Updated Wed, 07 Nov 2012 12:00 PM IST
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शिमला। मतदान के बाद शहर में सभी दलों के सियासी पंडितों की गणना में समीकरण गड़बड़ हो रहे हैं। हार-जीत किसी की भी हो पर भाजपा से बगावत कर बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले तरसेम भारती ने सबकी नींद छीन ली है। भारती के चुनाव लड़ने से कोई कांग्रेस को नुकसान बता रहा है तो कोई भाजपा और माकपा को। खुद भारती का दावा है कि वे 100 फीसदी चुनाव में जीत हासिल करेंगे। हालांकि वे खुद के चुनाव लड़ने से भाजपा और माकपा को नुकसान मानते हैं। उधर, दूसरे दलों की दलील मानें तो उन्हें भारती के चुनाव लड़ने से कोई फर्क नहीं पड़ता। राजनीतिक पंडित कहते हैं कि फर्क तो पड़ता है।
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इस मामले में बात करने पर तरसेम भारती ने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान माकपा और भाजपा को हुआ होगा। एससी, ओबीसी, सामान्य के अलावा कांग्रेस और भाजपा के रुष्ठ कार्यकर्ताओं ने भी उन्हें वोट डाले हैं। तरसेम अपनी गणना के मुताबिक 100 फीसदी जीत का दावा कर रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस ने ऊपरी शिमला के उम्मीदवारों पर दांव खेला है। माकपा ने छह माह पहले डिप्टी मेयर बने टिकेंद्र पंवर को मैदान में उतारा। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ऊपरी शिमला का वोट कुछ हद तक ऊपरी शिमला के प्रत्याशियों में बंटा है। दौलत राम चौहान को छोड़ शिमला शहर में लगातार दूसरी मर्तबा कोई विधायक बनने का रिकार्ड नहीं बना पाए हैं। माकपा को नगर निगम में कुछ महीने पहले ही शहर की जनता ने बड़े मार्जन से सीट पर बैठाया। हरीश जनारथा डिप्टी मेयर रह चुके हैं।
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कोई नुकसान नहीं हुआ
माकपा प्रत्याशी टिकेंद्र पंवर का कहना है कि उन्हें तरसेम से कोई नुकसान नहीं हुआ।
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माकपा-कांग्रेस के वोट पर सेंध
भाजपा प्रत्याशी सुरेश भारद्वाज कहते हैं कि तरसेम भारती ने कांग्रेस और माकपा के वोट पर ही सेंध लगाई है। भाजपा को कोई फर्क नहीं पड़ा।
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कोई फर्क नहीं पड़ा
कांग्रेस प्रत्याशी हरीश जनारथा का मानना है कि तरसेम भारती के चुनाव लड़ने से कांग्रेस को कोई फर्क नहीं पड़ा।
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