शिमला। चुनाव क्या हुए सरकारी कार्यालयों में काम की रफ्तार थम-सी गई है। पहले चुनाव का शोर रहा, उसके बाद वोट डले। आचार संहित लगने से ऐसे ही नया काम न करने की वजह अफसरों को मिल गई। आम पब्लिक परेशान नजर आई। बीस दिसंबर को चुनाव परिणाम घोषित हुआ। लोगों को उम्मीद जगी अब तो रूटीन में काम हो जाएंगे। अफसर सीट पर ही मिलेंगे लेकिन सत्ता परिवर्तित क्या हुई, अफसरों ने काम में रुचि लेना ही छोड़ दिया है। बस किसी एक अफसर के कमरे में जुंडली बनाकर अपने ट्रांसफर आर्डर का इंतजार कर रहे हैं। अफसरों में धुकधुकी बढ़ गई है। पता नहीं, नई सरकार उन्हें कहां पटक दे। इस सारी प्रक्रिया में आम जनता पिस रही है। उपायुक्त कार्यालय हो या फिर एसपी आफिस सभी जिला कार्यालयों में यही आलम है।
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विभाग के मुखिया का बदलना तो तय है, लेकिन उनके अधीनस्थों को भी ट्रांसफर का डर सता रहा है। रोज एक नया हौव्वा लेकर कोई न कोई कार्यालय में लेकर आता है और कहता है लिस्टें तैयार हो गई हैं। आर्डर कभी भी निकल सकते हैं। इस टेंशन में एक-एक दिन निकाल पाना मुश्किल हो रहा है। सभी की एक टेंशन है, तबादला दूसरे जिले में होगा तो परिवार डिस्टर्ब हो जाएगा। बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा? जिन अफसरों को एक स्टेशन पर एक से दो साल भी हुए हैं, वे भी सहमे हुए हैं। अफसरों का कहना है कि शुरू के दो से तीन महीने तक यही आलम रहेगा। उसके बाद धीरे-धीरे पहले की तरह सब पटरी पर आ जाएगा।