शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने लारजी हादसे की तकनीकी जांच बैठा दी गई है। सूबे के ऊर्जा निदेशालय के मुख्य अभियंता नीरज कपूर को तकनीकी पड़ताल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अगले 15 दिन के भीतर मुख्य अभियंता को अपनी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपनी है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निर्देश के बाद यह आदेश जारी किया गया।
मंडलायुक्त मंडी की रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार में हड़कंप मचा हुआ है। रिपोर्ट को चेक करने के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मुख्यसचिव पी मित्रा को निर्देश दिया था कि पूरे प्रकरण की तकनीकी जांच मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी से कराई जाए। इसके बाद सोमवार को सरकार की ओर से तकनीकी जांच करने के लिए ऊर्जा निदेशालय के मुख्य अभियंता नीरज कपूर को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। उन्हें अगले 15 दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। उन्हें स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) से लेकर बांध से पानी छोड़ने और सायरन बजने तक के पहलुओं पर पड़ताल करनी है। जांच में कोई भी पहलू छूट न पाए, इस पर ध्यान देने के लिए कहा गया है।
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मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सोमवार को तकनीकी जांच बैठा दी गई है। जांच की जिम्मेदारी ऊर्जा निदेशालय के नीरज कपूर को सौंपी गई है, जिन्हें 15 दिन के भीतर रिपोर्ट देनी है। उन्हीं के रिपोर्ट के आधार पर दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई तय की जाएगी। - एसकेबीएस नेगी, प्रधान सचिव ऊर्जा
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सरकार ने बोर्ड की रिपोर्ट को किया खारिज
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य बिजली बोर्ड की रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है। इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार स्तर पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। प्रधान सचिव ऊर्जा एसकेबीएस नेगी ने बताया कि प्राथमिक जानकारी भर के लिए बोर्ड से यह रिपोर्ट मंगाई थी, जिससे मौके की वस्तुस्थिति का पता चल सके। बिजली बोर्ड की ओर से दो रिपोर्ट सरकार को दी गई थी। एक रिपोर्ट मुख्य अभियंता मंडी ने सौंपी थी। जबकि इससे पहले प्रबंधन निदेशक पीसी नेगी की ओर से खुद एक रिपोर्ट सरकार को दी गई थी।