शिमला। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के दोनों गुटों में आपसी मतभेद के चलते कर्मचारियों की संयुक्त सलाहकार समिति (जेसीसी) फंस गई है। महासंघ के दोनों गुट प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, लेकिन कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा नहीं हो रही है। कांग्रेस पार्टी को सत्ता में आए हुए डेढ़ साल से अधिक समय हो गया है, लेकिन अभी तक कर्मचारियों की मांग को लेकर सरकार के साथ बैठक नहीं हुई है।
अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (जोगटा गुट) के अध्यक्ष एसएस जोगटा बुधवार को मुख्य सचिव पी मित्रा से मिलने जा रहे हैं। जोगटा उनसे महासंघ की अधिसूचना जारी किए जाने की मांग करेंगे। हालांकि, जोगटा ने पहले भी सीएस से मुलाकात की थी। उस वक्त उन्होंने जोगटा और मनकोटिया से समझौता पत्र मांगा था, लेकिन समानांतर गुट के अध्यक्ष सुरेंद्र मनकोटिया ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करने से मना किया है। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य कार्यकारिणी में उनके संगठन के साथ जुड़े पदाधिकारियों को कार्यकारिणी में शामिल नहीं किया जाएं, तब तक हस्ताक्षर नहीं करेंगे।
दोनों गुटों से सौंप रखा है ज्ञापन
महासंघ के दोनों गुटों ने मुख्यमंत्री को कर्मचारियों की मांग संबंधित ज्ञापन सौंप रखा है। दोनों गुटों ने सरकार से जेसीसी किए जाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने दोनों गुटों को पहले एकजुट होने की सलाह दी थी, उसके बाद ही जेसीसी करने का आश्वासन दिया था।