अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी खेल परिसर में ओटली के हाथों से बने लकड़ी के फूल लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन फूलों से भले ही महक न आती हो लेकिन इनके आकर्षण से लोग अछूते नहीं। नागालैंड की रहने वाली ओटली ने यहां चल रहे जनजातीय मेला उत्पाद प्रदर्शनी में अपना स्टाल लगा रखा है।
इंदिरा गांधी खेल परिसर में लगी इस प्रदर्शनी में ओटली के बनाए उत्पाद काफी पसंद किए जा रहे हैं। लकड़ी से बने फूल ऐेसे दिखते हैं मानों असली हों। लोगों का कहना है कि उन्होंने कपड़े और प्लास्टिक से बने फूल तो देखे थे लेकिन लकड़ी से बने फूल पहली बार देख रहे हैं। ओटली ने बताया कि इन फूलों में इस्तेमाल की जाने वाली लकड़ी पानी में तैयार होती है। यह काफी मजबूत होती है। लकड़ी को पानी में डुबोकर फूलों का सुंदर आकार दिया जाता है। फूलों के बाहरी भाग में रंग भी प्राकृतिक होते हैं। फूल लकड़ी और मक्की के बाहरी छिलकों को सूखाकर तैयार किया जाता है। इसमें फलों के बीज भी इस्तेमाल होते हैं। वॉटर कलर से फूलों के बाहरी भाग को रंगा जाता है। ओटोली ने बताया कि उन्हें बचपन से ही प्रकृति से बहुत प्रेम था। वह अपने आसपास फूलों की सुंदरता को घंटो तक निहारती रहती थी। बहुत दुख होता था जब कोई फूलों को तोड़कर फेंक देता था। फूलों की खूबसूरती पौधों पर होती है, इसलिए इसे न तोड़े।
उन्होंने खास तौर पर अभिभावकों से आग्रह किया कि बच्चों को प्रकृति के बारे में जागरूक करें। पौधे लगाएं ताकि प्रकृति सुंदर बने। ओटली ने बताया कि फूलों से प्यार के कारण ही उन्होंने लकड़ी के फूल बनाना शुरू किए। आज यह उनका पेशा बन गया है। लकड़ी से बने फूल न खराब होते हैं और न ही मुरझाते हैं। बताया कि इस कार्य से वह अच्छी आमदनी कमा रही है। लोगों से सराहना भी मिल रही है। खास तौर पर महिलाएं उनके काम की प्रशंसा कर रही है। वह अन्य महिलाओं को भी संदेश देना चाहती हैं कि वह अपनी तथा अपने परिवार की जरूरतों को इस तरह के कार्य करके पूरा कर सकती हैं।