अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। मौसम की मार से किसान और बागवान परेशान हो गए हैं। पहले तूफान और ओलावृष्टि ने फसलें तबाह कर दीं। अब बारिश न होने से रही-सही कसर पूरी हो रही है। नकदी फसलों के अलावा सेब पर इसका प्रभाव पड़ रहा है। किसानों और बागवानों की फसलों पर संकट पैदा हो गया है।
मटर की फसल खेतों में ही सूख गई है। इससे किसान चिंतित हो गए हैं। इसके अलावा फ्रांसबीन और गोभी की फसल पर भी सूखे की मार पड़ी है। बागवानों की सेब और नाशपाती की फसल पहले ही ओलावृष्टि से प्रभावित हो चुकी है। बची फसल गर्मी के कारण ड्रॉपिंग का शिकार हो रही है। इधर, सूखे की मार से पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है। जिले में लोग पहले ही पानी के तरस रहे हैं। अब बारिश न होने के कारण फसलों पर संकट पैदा हो गया है। कृषि विभाग के उप-निदेशक डॉ. पीपी वर्मा का कहना है कि किसान सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं को अपनाकर फसलों को को बचा सकते हैं। बागवानी विभाग के उप-निदेशक डॉ. सुभाष ने बताया कि बागवान केंद्र सरकार की कृषि सिंचाई योजनाओं का लाभ ले सकते हैं। इससे सूखे में बागवानों को राहत मिल सकती है।
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जून माह की ड्रॉपिंग मई में शुरू
सेब, नाशपाती और अन्य फलों की ड्रॉपिग जून माह में होती थी, लेकिन इस साल मई महीने में ही पेड़ों में फलों की ड्रॉपिंग शुरू हो गई है। खेतों की नमी गायब हो गई है। पेड़ों की पत्तियां मुरझा गई हैं।
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सूखे की चपेट में बागीचे : राम गोपाल
कोटखाई के बागवान राम गोपाल का कहना है कि बारिश न होने से बागीचे सूखे की चपेट में आ गए हैं। पहले ही सेब की पतली फसल है, उसमें भी ड्रॉपिंग शुरू हो गई है।
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मौसम यही रहा तो बर्बाद हो जाएगी फसल : हरदयाल
ठियोग के किसान हरदयाल सिंह का कहना है कि गर्मी के चलते मटर की फसल खेतों में ही सूख गई है। अगर बारिश न हुई तो गोभी और फ्रांसबीन की फसल बर्बाद हो जाएगी।