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कूड़ा शुल्क से भी कम किराया दे रहे कारोबारी, नई दरों पर फैसला आज

अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 24 Dec 2018 03:10 PM IST
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शिमला। शहर में नगर निगम की संपत्तियों का किराया बढ़ाने पर सोमवार को फैसला लिया जाएगा। महापौर कुसुम सदरेट की अध्यक्षता में होने वाले विशेष सदन में नई किराया दरों पर चर्चा की जाएगी। शहर में कई कारोबारी ऐसे हैं जो लाखों रुपये की कमाई होने के बावजूद कूड़ा शुल्क से भी कम किराया नगर निगम को दे रहे हैं।
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नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार गंज बाजार में कई दुकानें ऐसी हैं जिनका किराया 37 पैसे से लेकर 90 पैसा प्रतिवर्ग फीट है। इनका मासिक किराया 200 से 700 रुपये के बीच है। उधर, दुकानों का कूड़ा शुल्क भी 200 से लेकर एक हजार रुपये तक है। इस तरह कई कारोबारी ऐसे हैं जो कूड़ा शुल्क ज्यादा और किराया कम देते हैं। निगम प्रशासन ने जो प्रस्ताव तैयार किया है, वह मौजूदा मार्केट रेट से काफी कम है। लेकिन कारोबारी इसका भी विरोध कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रस्ताव पर महापौर समेत पार्षद निगम प्रशासन का साथ देते हैं या फिर ये चंद कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए किराया कम करवाते हैं। विशेष सदन में मालरोड, गंज बाजार, लोअर बाजार, सब्जी मंडी समेत उपनगरों में स्थित नगर निगम की दुकानों के किराए और लीज पर चर्चा की जाएगी।

तहबाजारी के बराबर भी नहीं देना चाहते किराया
शहर के गंज बाजार और लोअर बाजार के कई कारोबारी तहबाजारियों के बराबर भी शुल्क देने को राजी नहीं है। नगर निगम तहबाजारियों से 17 रुपये से लेकर 38 रुपये प्रतिवर्ग फीट की दर से किराया लेता है। जबकि ज्यादातर कारोबारी पांच रुपये प्रतिवर्ग फीट की दर से भी कम किराया देते हैं। कई ऐसे हैं जिनका किराया एक रुपये प्रतिवर्ग फीट से भी कम हैं। नगर निगम ने गंज के लिए 25 रुपये जबकि लोअर बाजार के लिए 40 रुपये प्रतिवर्ग फीट की दर से किराया लेने का प्रस्ताव बनाया है जिसका कारोबारी विरोध कर रहे हैं।
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अवैध निर्माण करना अब पड़ेगा महंगा
नगर नगम से ली दुकानों में अवैध निर्माण करना महंगा पड़ेगा। नए प्रस्ताव के तहत अवैध निर्माण पर पांच हजार रुपये प्रतिवर्ग फुट के अनुसार जुर्माना वसूला जाएगा। साथ ही किराया भी 70 रुपये प्रतिवर्ग फीट की दर से तय होगा। सदन में इस प्रस्ताव को भी चर्चा के लिए रखा जाएगा। शहर में नगर निगम की 30 फीसदी से ज्यादा दुकानों में अवैध निर्माण हो चुका है। लेकिन कारोबारी पहले की तरह ही कम किराया दे रहे हैं।
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