शिमला। कॉलेजों में यूजी की परीक्षाएं चली हैं, तो अगले माह से पीजी की परीक्षाएं भी शुरू होने जा रही हैं। प्रदेश में विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के सहयोगी संगठन प्रचार अभियान में कम ही नजर आ रहे हैं। कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्र संगठनों के कार्यकर्ता चाह कर भी अपने नेताओं के प्रचार प्रसार के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं। जाहिर है कि छात्रों के लिए कॉलेजों में चल रही सेमेस्टर परीक्षा देना और उसकी तैयारी करना अधिक जरूरी है, इसलिए वे परीक्षाओं को ही तवज्जो दे रहे हैं। यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में पूरे साल राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले छात्र संगठन कार्यकर्ता परीक्षाओं में उलझ गए हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों को युवा कार्यकर्ताओं की फौज जुटाना मुश्किल हो रहा है। यही वो फौज है, जो चुनाव के समय दिन-रात एक पोस्टर बैनर लगाने से लेकर डोर टू डोर प्रचार अभियान चलाती है। छात्र संगठनों के कार्यकर्ता परीक्षाओं और पीजी परीक्षाओं की नजदीकी के बावजूद चुनाव प्रचार के लिए समय निकालने का प्रयास जरूर कर रहे हैं। इसकी वजह है कि इन्हीं संगठनों से निकल कर गए कई नेता आज अलग-अलग चुनाव क्षेत्र से मैदान में हैं। इनमें एसएफआई के पांच से अधिक छात्र नेता विधानसभा चुनाव मैदान में हैं। वहीं, एबीवीपी के भी ऐसे कई नेता ऐसे हैं जो एबीवीपी में रहे हैं और विधानसभा चुनाव में अपनी किसमत आजमा रहे हैं। छात्र संगठनों से जुड़े या सक्रिय नेताओं की प्रचार अभियान में कमी राजनीतिक दलों को खल रही है, जिसके चलते प्रचार अभियान का जिम्मा पार्टियों के कार्यकर्ताओं पर है।
एचपीयू से संबद्ध डिग्री कॉलेजों में इन दिनों यूजी की परीक्षाएं चल रही हैं, जो विधानसभा चुनाव के बाद तक बराबर जारी रहेंगी। बीस नवंबर से एचपीयू की पीजी की परीक्षाएं शुरू होनी हैं, जिसकी तैयारी भी छात्र इन दिनों कर रहे हैं।