सीएम कुल्लू में एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
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हिमाचल सरकार और इंस्टीट्यूट फॉर नारकोटिक्स स्टडीज एंड एनालिसिस की ओर से आयोजित नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की कार्यशाला में सीएम वीरभद्र ने कहा कि नशाखोरी और इसके उत्पादन पर रोक लगाने के लिए विकल्प देने की जरूरत है।
यह समस्या सिर्फ कुल्लू और हिमाचल प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के साथ-साथ पूरे विश्व की है, लेकिन स्थानीय तौर पर होने वाली नशीले पदार्थों को रोकने के लिए उन लोगों के लिए विकल्प तलाशना जरूरी है, जिनकी रोजी-रोटी और आय का साधन नशीले पदार्थ हैं।
हिमाचल प्रदेश का कुल्लू जिला विश्व में नशीले पदार्थों की खेती के लिए बदनाम हुआ है और इस कलंक को मिटाने के लिए सबको मिलकर प्रयास करने होंगे। जिन दुर्गम क्षेत्रों में लोग नशे की खेती करके अपना जीवन यापन करते हैं, उन लोगों को सबसे पहले नशीली खेती की जगह ऐसा विकल्प देने की जरूरत है जिससे उनकी रोजी-रोटी के साथ-साथ आय में भी बढ़ोतरी हो।
जनता से भी नशे पर रोक के लिए सहयोग की अपील की है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के अधिकारियों से भी आह्वान किया कि वे इस क्षेत्र में अपना विशेष योगदान दें। हालांकि एनसीबी के गठन के बाद अब तक नशे की खेती और तस्करी को रोकने के लिए इस संस्था का काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा है, पर अभी इसके समूल नाश के लिए और कड़े प्रयास करने की जरूरत है।
लोगों का ध्यान नशीले पदार्थों की खेती करने से हटाने के लिए इन्हें बागवानी और कृषि कार्य की ओर मोड़ने की जरूरत है। इन विभागों में कई कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं जो बागवानों और किसानों के लिए काफी फायदेमंद हो सकती है।