हिमाचल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के कारणों पर मंथन के लिए शिमला में पार्टी की बैठक हुई। बैठक में प्रदेश प्रभारी सुशील शिंदे और सह प्रभारी रंजीत रंजन की मौजूदगी में हारे हुए प्रत्याशियों ने बेबाकी से अपनी बातें कहीं।
हिमाचल विधानसभा चुनाव में मोदी लहर नहीं थी। कांग्रेस प्रत्याशियों की हार भितरघातियों और षड्यंत्र के कारण हुई है। शिमला स्थित कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आत्ममंथन बैठक के दौरान चुनाव में हारे प्रत्याशियों ने बेबाकी से ये बातें कहीं।
कुछ प्रत्याशियों ने तो वीरभद्र सिंह का नाम लिए बगैर संकेतों में हार के लिए उन्हें जिम्मेवार ठहराया। सभी प्रत्याशियों से बातचीत के बाद पार्टी के प्रदेश प्रभारी सुशील कुमार शिंदे ने पुरानी बातें भुलाकर साल 2019 में होने में लोकसभा चुनाव के लिए एकजुट होने की अपील की।
चुनाव में हारे 47 प्रत्याशियों से की गई बातचीत
शुक्रवार दोपहर तीन बजे प्रदेश प्रभारी सुशील शिंदे और सह प्रभारी रंजीत रंजन कांग्रेस भवन पहुंचे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू की अध्यक्षता में हुई आत्ममंथन बैठक में विस चुनाव में हारे 47 प्रत्याशियों से बातचीत की गई।
हारे हुए कुछ प्रत्याशियों ने कहा कि उनके क्षेत्रों में पार्टी के ही कुछ बड़े नेताओं के रचे गए षड्यंत्र के चलते उन्हें हार मिली है। कुछ ने कहा, भितरघातियों को भी पार्टी के बड़े नेताओं की शह थी।
यह भितरघाती उनकी हार का कारण बने। कुछ प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ने को पार्टी से कम फंड मिलने की बात भी कही। बैठक के बाद प्रभारी और सह प्रभारी ने कुछ हारे हुए प्रत्याशियों के साथ अकेले में भी बात की। इसके बाद कांग्रेस के संगठनात्मक जिलाध्यक्षों से भी रिपोर्ट ली गई।
षड्यंत्र होते रहते हैं, इससे उभरना होगा : सुक्खू
बैठक में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुशील शिंदे ने कहा कि हारे गए प्रत्याशियों की ओर से गिनाए गए कारणों की रिपोर्ट हाईकमान को दी जाएगी। इन कमियों को दूर करने के लिए सख्ती से कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने सभी हारे प्रत्याशियों से 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए अभी से कमर कसने का आह्वान किया। शिंदे ने हिमाचल में पार्टी को 21 सीटें जिताने के लिए मतदाताओं को आभार जताया।
प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू ने कहा कि विधानसभा चुनावों में षड्यंत्र होते रहते हैं। हमें इनसे उभरना होगा। भविष्य में और अधिक एकजुट होकर पार्टी की जीत के लिए काम करना होगा।
चुनावों में विकास मुद्दा था, लेकिन विकास के साथ स्थानीय मुद्दे तथा स्थानीय समस्याएं भी होती हैं। बेहतर होता कि समय रहते हम स्थानीय बातों को चुनावी अभियान में जोड़ पाते। सुक्खू ने अपने भाषण में संकेत दिए कि पार्टी तथा संगठन में तालमेल का अभाव हार का बड़ा कारण रहा।
बैठक में नहीं पहुंचे ये दिग्गज
कांग्रेस के हारे हुए प्रत्याशियों के साथ रखी गई बैठक में जीएस बाली और सुधीर शर्मा नहीं आए। दोनों नेताओें की अनुपस्थिति को लेकर कांग्रेस मुख्यालय में खूब चर्चाएं होती रहीं। उधर, कौल सिंह, ठाकुर सिंह भरमौरी, प्रकाश चौधरी, चंद्र कुमार, सुभाष मंगलेट, हरभजन सिंह भज्जी, किशोरी लाल,
राम कुमार चौधरी, विनोद सुल्तानपुरी, रोहित ठाकुर, कुलदीप कुमार, राकेश कालिया, संजय रत्न, मनसाराम, गंगूराम मुसाफिर, अजय महाजन, रामलाल मारकंडेय, चंपा ठाकुर, कुलदीप पठानिया सहित कई हारे हुए प्रत्याशी बैठक में मौजूद रहे।
सुक्खू का हुआ जोरदार स्वागत
विधानसभा चुनाव जीतकर पहली बार कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू का शिमला शहर और शिमला ग्रामीण के समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। सैकड़ों समर्थक फूलमालाएं और गुलदस्ते लेकर दफ्तर के गेट पर खड़े रहे।
सुक्खू के पहुंचते ही समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी की। जिला हमीरपुर के नादौन में कांग्रेस का झंडा बुलंद करने पर सुक्खू को बधाइयां देने के लिए आने वालों का तांता लगा रहा।
सत्ती को हराने वाले रायजादा कौन हैं
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती को हराने वाले कांग्रेस प्रत्याशी सतपाल सिंह रायजादा की कांग्रेस दफ्तर में काफी डिमांड रही। समर्थक एक-दूसरे को कहते हुए सुने गए कि सत्ती को हराने वाला रायजादा कौन है। चर्चित चेहरा नहीं होने के चलते रायजादा को कई समर्थक पहचान नहीं सके। पहचान होने के बाद रायजादा के पास जाकर सैकड़ों समर्थकों ने हाथ मिलाते हुए बधाइयां दीं।
आया राम-गया राम’ का बयान पड़ा भारी
कांग्रेस दफ्तर में मंडी जिले से आए कांग्रेस समर्थक कहते हुए सुने गए कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से सुखराम को लेकर दिया गया ‘आया राम-गया राम’ का बयान भारी पड़ा है। इस बयान के चलते जिले के लोगों में काफी रोष रहा। इसका खामियाजा पार्टी को सभी दस सीटें गंवाकर भुगतना पड़ा।
हार के बाद अलग-थलग दिखे दिग्गज
शिमला। चुनावों में हार मिलने के बाद शिमला पहुंचे कांग्रेस के कई दिग्गज नेता राजीव भवन में अलग-थलग दिखे। सत्ता के समय जिन नेताओं के स्वागत में समर्थक गेट पर पलके बिछाए खड़े रहते थे, शुक्रवार को ऐसा नजारा नहीं दिखा। हार जाने के बाद इन दिग्गज नेताओं की कांग्रेस ऑफिस पहुंचने पर खासी आवभगत नहीं हुई। गाड़ियों से उतरने के बाद अकेले ही कई नेताओं को नीचे सभागार तक जाना पड़ा।